Gopalganj News : (गोपालगंज से अखिल कुमार की रिपोर्ट) केंद्र और राज्य सरकारें स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं. स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव से लेकर शहर तक साफ-सफाई बनाए रखने, लोगों को जागरूक करने तथा सरकारी कार्यालयों को स्वच्छ एवं व्यवस्थित रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. इसके बावजूद मांझा प्रखंड के कई सरकारी कार्यालयों की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है.
प्रखंड के विभिन्न विभागीय कार्यालयों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है. परिसर में झाड़ियां उग आई हैं और साफ-सफाई के अभाव में कार्यालयों की स्थिति बदहाल होती जा रही है. सबसे खराब हालात प्रखंड कृषि विभाग कार्यालय की बताई जा रही है. यहां परिसर में जगह-जगह कूड़े-कचरे का ढेर जमा है और लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण झाड़ियां फैल चुकी हैं.
कचरे के दुर्गंध से होती है परेशानी
कार्यालय परिसर में फैले कचरे से दुर्गंध उठती है, जिससे कर्मचारियों के साथ-साथ यहां आने वाले किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय परिसर की नियमित सफाई नहीं कराई जाती. वर्षों से जमा कचरे को हटाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है.
बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है. कचरे और झाड़ियों के बीच जलजमाव होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने का खतरा बना रहता है, जिससे संक्रामक बीमारियों की आशंका भी बढ़ जाती है. कुछ माह पूर्व मांझा क्षेत्र में डेंगू का असर देखने को मिला था. उस दौरान स्वास्थ्य विभाग लोगों को साफ-सफाई रखने और पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दे रहा था, लेकिन सरकारी कार्यालयों में ही स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकी.
नियमित निगरानी और निरीक्षण का अभाव
कार्यालय परिसर में स्थित शौचालय की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है. नियमित सफाई के अभाव में वहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे उसका उपयोग करना मुश्किल हो गया है. कर्मचारियों और आम लोगों को इससे काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब सरकारी दफ्तरों में ही गंदगी का आलम होगा तो आम लोगों को स्वच्छता का संदेश कैसे दिया जा सकेगा. लोगों का आरोप है कि नियमित निगरानी और निरीक्षण के अभाव में सरकारी परिसरों की यह स्थिति उत्पन्न हुई है.
कई बार सफाई कराने की मांग, लेकिन अबतक कोई पहल नहीं
कृषि विभाग कार्यालय परिसर में कई स्थानों पर झाड़ियां इतनी घनी हो गई हैं कि वहां सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों के छिपे रहने की आशंका बनी रहती है. कर्मचारियों और किसानों का कहना है कि कई बार सफाई की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. परिसर के कुछ फर्श भी टूट चुके हैं, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है.
जानकारी के अनुसार, प्रखंड क्षेत्र के कई अन्य सरकारी कार्यालयों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है. कहीं घास-फूस उगी हुई है तो कहीं कूड़े-कचरे का ढेर लगा हुआ है. नियमित सफाई नहीं होने से कार्यालय परिसरों की सुंदरता और उपयोगिता दोनों प्रभावित हो रही हैं.
प्रखंड के सभी कार्यालयों की नियमित सफाई कराने की मांग
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्वच्छ वातावरण न केवल स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि यह सरकारी संस्थानों की कार्यसंस्कृति को भी दर्शाता है. साफ-सुथरे कार्यालय लोगों पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं, जबकि गंदगी और अव्यवस्था विभागीय लापरवाही को उजागर करती है.
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि प्रखंड के सभी सरकारी कार्यालयों में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. साथ ही झाड़ियों की कटाई, कचरे का निष्पादन और शौचालयों की नियमित सफाई कराकर स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को धरातल पर उतारा जाए.
Also Read : लापरवाह थानाध्यक्षों पर एसपी का बड़ा एक्शन, 21 का वेतन रोका
