Former MP Nagina Rai murder case: पूर्व सांसद और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री नगीना राय के 35 वर्ष पुराने बहुचर्चित हत्याकांड में अब उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सुनवाई होगी. जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार सिंह की अदालत में इस मामले पर सुनवाई हुई. निचली अदालत से मूल रिकॉर्ड नहीं मिलने के कारण यह मामला पिछले नौ महीनों से अटका हुआ था, जिसे अदालत ने बेहद गंभीरता से लिया है.
मूल रिकॉर्ड के पक्के नकल पर सहमति
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता वेद प्रकाश तिवारी ने अदालत से गुहार लगाई कि मामले का मूल रिकॉर्ड भले न मिला हो, लेकिन एफआईआर, आरोप पत्र, गवाहों के बयान और पक्की नकल उपलब्ध हैं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने के दस्तावेज भी मौजूद हैं. उन्होंने केस को रिकंस्ट्रक्ट (पुनर्गठित) कर ट्रायल पूरा करने की अपील की, जिस पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल दुबे ने भी अपनी सहमति दे दी.
बचाव पक्ष को बहस का आदेश मिला
दोनों पक्षों की रजामंदी के बाद अदालत ने बचाव पक्ष को बहस शुरू करने का निर्देश जारी किया. बचाव पक्ष की ओर से बाहर से वरिष्ठ अधिवक्ता को बुलाने के लिए मोहलत मांगी गई, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 16 सितंबर निर्धारित की है. पिछले 35 वर्षों से लंबित इस हाई प्रोफाइल मामले में अब त्वरित फैसले की उम्मीद बंध गई है.
भोपतिपुर में सरेआम गोलियों से भूना था
कुचायकोट थाने में दर्ज कांड संख्या 40/1991 के अनुसार 10 अप्रैल 1991 की शाम करीब छह बजे पूर्व सांसद पटना से गोपालगंज लौट रहे थे. भोपतिपुर गांव के पास गन्ने से लदी बैलगाड़ी के कारण सड़क जाम थी और उनकी जीप रुक गई. इसी दौरान सात-आठ हथियारबंद अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं. दो गोलियां लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए और सदर अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया था.
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