Gopalganj News : आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाई जाने वाली देवशयनी एकादशी का व्रत इस वर्ष शनिवार को रखा जाएगा. इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होगी. धर्मशास्त्र के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं. इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं. जिले के प्रमुख मंदिरों में देवशयनी एकादशी को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं.
देवशयनी एकादशी से शुरू होता है चातुर्मास
धर्म-शास्त्र विशेषज्ञ डॉ. अमित तिवारी ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी से भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं. इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी के दिन योगनिद्रा से जागते हैं. इसी के बाद विवाह सहित सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत होती है.
चार महीने तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य
चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत, मुंडन और उपनयन (जनेऊ) जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. इस अवधि में श्रद्धालु पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों में अधिक समय व्यतीत करते हैं. भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले पुष्प, तुलसी दल, चंदन, धूप और दीप अर्पित कर विशेष पूजा की जाती है.
त्याग, साधना और आत्मचिंतन का पवित्र काल
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास के नियम भी प्रारंभ हो जाते हैं. श्रद्धालु इस दौरान किसी एक बुरी आदत या किसी विशेष खाद्य पदार्थ का त्याग करने का संकल्प लेते हैं. व्रत के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह समय आत्मचिंतन, ईश्वर भक्ति, मंत्र साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम होता है. साधु-संत भी इस अवधि में एक स्थान पर रहकर प्रवचन और भागवत कथा का आयोजन करते हैं.
जिले के प्रमुख मंदिरों में विशेष तैयारी
देवशयनी एकादशी को लेकर जिले के राम-जानकी मंदिर, हजियापुर मंदिर, गौरा मठ, पकडियार, बथना, बंगरा, अमवां-विजयपुर तथा बरौली मठ एवं मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है.
जानें एकादशी तिथि और पारण का समय
एकादशी तिथि शुक्रवार सुबह 9:12 बजे से प्रारंभ होकर शनिवार सुबह 11:34 बजे तक रहेगी. अभिजीत मुहूर्त में पूजा का श्रेष्ठ समय दोपहर 12:19 बजे से 1:11 बजे तक रहेगा. वहीं व्रत का पारण 26 जुलाई 2026 को सुबह 6:13 बजे से 8:50 बजे के बीच किया जाएगा.
20 नवंबर को होगा चातुर्मास का समापन
चार माह तक चलने वाले चातुर्मास का समापन 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के दिन होगा. इसी दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागेंगे. इसके बाद तुलसी विवाह का आयोजन होगा और सभी शुभ एवं मांगलिक कार्य पुनः प्रारंभ हो जाएंगे.
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