Gopalganj School Cleaning Dispute : बिहार के गोपालगंज से एक सरकारी विद्यालय में छात्र-छात्राओं से साफ-सफाई कराने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस मामले के तूल पकड़ते ही शिक्षा विभाग तुरंत हरकत में आ गया है. जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने सख्त एक्शन लेते हुए संबंधित स्कूल के हेडमास्टर को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है.
हजियापुर मध्य विद्यालय का है वायरल वीडियो
दरअसल, गोपालगंज जिले के सदर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय, हजियापुर का एक वीडियो इंटरनेट पर सुर्खियां बटोर रहा है. इस वायरल वीडियो में छोटे-छोटे स्कूली बच्चे पढ़ाई करने के बजाय स्कूल परिसर में झाड़ू लगाते और साफ-सफाई करते नजर आ रहे हैं. घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश है.
डीईओ ने लिया कड़ा संज्ञान, जारी किया नोटिस
वीडियो के वायरल होने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है. उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए हजियापुर मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक (हेडमास्टर) को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है. डीईओ ने स्पष्ट किया है कि बच्चों से इस तरह का काम करवाना शिक्षा विभाग के नियमों के सख्त खिलाफ है.
पढ़ाई छोड़ झाड़ू लगाना गरिमा के है खिलाफ
शिक्षा विभाग ने अपने नोटिस में साफ कहा है कि प्रथम दृष्टया वीडियो देखने से पता चलता है कि विद्यालय में बच्चों से सफाई कराई जा रही है. विद्यालय एक विद्या का मंदिर है और यहां बच्चों को सिर्फ शिक्षा ग्रहण करने भेजा जाता है. उनसे मजदूरी या सफाई का काम कराना बच्चों की गरिमा और उनके अधिकारों का सीधा हनन है. इसे बाल श्रम की श्रेणी में भी रखा जा सकता है.
साफ-सफाई हाउसकीपिंग एजेंसी की है जिम्मेदारी
डीईओ ने हेडमास्टर की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं. उन्होंने याद दिलाया कि विभागीय निर्देशों के अनुसार सरकारी स्कूलों में साफ-सफाई का पूरा जिम्मा हाउसकीपिंग एजेंसी को सौंपा गया है. हाउसकीपिंग एजेंसी के होते हुए भी अगर मासूम बच्चों के हाथों में झाड़ू थमाई गई है, तो यह पूरी तरह से प्रशासनिक लापरवाही और प्रधानाध्यापक के मनमाने रवैये को दर्शाता है.
तीन दिन के भीतर मांगा गया है स्पष्टीकरण
हेडमास्टर को अपना पक्ष रखने के लिए तीन दिनों की मोहलत दी गई है. नोटिस में सख्ती से पूछा गया है कि छात्रों को शिक्षा से वंचित करने और उनसे बाल श्रम कराने के आरोप में उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए. इस कड़े अल्टीमेटम के बाद से विद्यालय के अन्य शिक्षकों में भी भारी हड़कंप मचा हुआ है.
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