गोपालगंज: जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों और महिलाओं को मिल रही बुनियादी सुविधाओं की अब जमीनी स्तर पर जांच होगी. खासकर केंद्रों पर शौचालय और स्वच्छ पेयजल की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा. आईसीडीएस निदेशालय के निर्देश पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) ने सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (सीडीपीओ) को एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.
विभाग ने स्पष्ट किया है कि पोषण ट्रैकर पर दर्ज आंकड़ों और भौतिक सत्यापन के दौरान मौके पर मिलने वाली स्थिति में अंतर नहीं होना चाहिए. यदि दोनों रिपोर्ट में अंतर पाया गया तो संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी.
बच्चों और महिलाओं के लिए जरूरी है बाल अनुकूल शौचालय
आईसीडीएस के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बाल अनुकूल शौचालय और स्वच्छ पेयजल की सुविधा जरूरी है.
जांच के दौरान ऐसे केंद्रों की पहचान की जाएगी, जहां शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है या मौजूद शौचालय उपयोग के योग्य नहीं है. ऐसे केंद्रों की अलग सूची तैयार कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
महिला पर्यवेक्षिकाओं के साथ होगा भौतिक सत्यापन
डीपीओ ने सभी सीडीपीओ को निर्देश दिया है कि महिला पर्यवेक्षिकाओं के साथ मिलकर विभागीय भवनों और अन्य सरकारी भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों का भौतिक सत्यापन करें.
जांच के दौरान शौचालय और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, उसकी स्थिति तथा उपयोगिता की जानकारी निर्धारित प्रपत्र में दर्ज की जाएगी. इसके बाद संबंधित सीडीपीओ को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट जिला स्तर पर उपलब्ध करानी होगी.
साथ ही पोषण ट्रैकर पर शौचालय और पेयजल से संबंधित सभी आंकड़ों को तत्काल अपडेट कराने का निर्देश दिया गया है.
पहले से चयनित केंद्रों को अभियान से रखा जाएगा बाहर
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय निर्माण के लिए पहले से पीएचईडी या मनरेगा के माध्यम से काम स्वीकृत या चयनित किया जा चुका है, उन्हें इस विशेष सत्यापन अभियान में शामिल नहीं किया जाएगा.
इससे उन केंद्रों की दोबारा पहचान करने से बचा जा सकेगा, जहां निर्माण की प्रक्रिया पहले ही स्वीकृत हो चुकी है.
एक सप्ताह बाद बनेगी जरूरतमंद केंद्रों की सूची
भौतिक सत्यापन के बाद जिले के उन आंगनबाड़ी केंद्रों की सूची तैयार की जाएगी, जहां शौचालय या स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है.
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस सूची के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू होगी. इससे आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
