गया जी में आज मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा, यज्ञोपवीत संस्कार, गुरु दीक्षा और विशेष पूजन होंगे आयोजित

आज (29 जुलाई) गया जी में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इस अवसर पर श्री रामानुज मठ और मंत्रालय पंडित रामाचार्य वैदिक पाठशाला सहित विभिन्न संस्थानों में विशेष पूजन, यज्ञोपवीत संस्कार, गुरु दीक्षा और भजन-कीर्तन जैसे कई धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है.

वैदिक काल यानी अनादिकाल से गुरु पूर्णिमा की शुरुआत हुई थी. यह पर्व मुख्य रूप से महान ऋषि महर्षि वेदव्यास के जन्मोत्सव और भगवान शिव के आदि गुरु बनने की पौराणिक कथाओं से जुड़ा है.

इस तिथि को वेदों का विभाजन करने वाले और महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था. प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है. इस वर्ष यह उत्सव 29 जुलाई को मनाया जा रहा है.

शहर की कई वैदिक पाठशालाओं में इस अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. देवघाट के पास स्थित श्री रामानुज मठ, बाइपास हनुमान मंदिर स्थित मंत्रालय पंडित रामाचार्य वैदिक पाठशाला सहित शहर में संचालित कई अन्य वैदिक पाठशालाओं में आज गुरु पूर्णिमा पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं.

श्री रामानुज मठ में 100 से अधिक बटुकों का होगा यज्ञोपवीत संस्कार

श्री रामानुज मठ में संचालित वैदिक पाठशाला में गुरु पूर्णिमा पर भगवान का विशेष पूजन, गुरु पूजन सहित कई अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किये जा रहे हैं. साथ ही, 100 से अधिक बटुक ब्राह्मणों का यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार होगा.

संस्कार के बाद वे वैष्णव परंपरा के अनुसार शरीर पर पवित्र मुद्रा भी धारण करेंगे, तब उन्हें वेदों के ज्ञान का अधिकार मिलेगा. शिष्यों को गुरु दीक्षा भी दी जायेगी.

यहां आयोजित होने वाले कार्यक्रम में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित देश के कई अन्य राज्यों से 1000 से अधिक शिष्यों का आगमन हो चुका है. सभी अनुष्ठान व कार्यक्रम मठ के महंत स्वामी वेंकटेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज के निर्देशन में संपन्न हो रहे हैं.

अनुष्ठान पूरा होने के बाद मौजूद सभी लोगों के बीच भगवान का प्रसाद वितरित किया जाएगा तथा रात में भजन-कीर्तन का भी आयोजन होगा.

मंत्रालय श्री वैदिक पाठशाला और अन्य संस्थानों में तैयारियां

मंत्रालय श्री वैदिक पाठशाला के आचार्य पंडित राजा आचार्य ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के दिन ब्रह्मचारी बच्चों का नूतन यज्ञोपवीत संस्कार कराया जा रहा है और गुरु दीक्षा दी जा रही है. उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार से विद्यार्थियों के अंदर एक नयी ऊर्जा का संचार होता है.

महोत्सव का शुभारंभ सुबह 07:30 बजे से हुआ, जिसमें सबसे पहले देवता पूजन, फिर हवन और यज्ञोपवीत के बाद पारंपरिक भिक्षा संस्कार की रस्म निभाई जा रही है. अंत में आरती और प्रसाद का वितरण होगा.

श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति द्वारा आयोजित वेद पाठशाला में भी गुरु पूर्णिमा धूमधाम से मनाने की पूरी तैयारी की गयी है, जिसकी जानकारी समिति के सदस्य मणिलाल बारिक ने दी.

गुरु पूर्णिमा: सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक

स्वामी वेंकटेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने बताया कि आज मठ में विराजमान भगवान श्रीलक्ष्मी नारायण का पंचामृत से महाअभिषेक किया जा रहा है. इसके बाद श्री त्रिदंडी देव वेद विद्यालय के छात्रों व अन्य बटुक ब्राह्मणों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न होगा.

उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का जीवंत प्रतीक है. गुरु ही शिष्य के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाकर उसे अज्ञान के अंधकार से बाहर निकालते हैं.

पौराणिक महत्व की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इसी तिथि को महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था और उनके शिष्यों ने सबसे पहले उनका पूजन किया था, जिसके बाद से इसे 'व्यास पूर्णिमा' या गुरु पूर्णिमा कहा जाने लगा.

योग परंपरा के अनुसार, इसी पूर्णिमा को भगवान शिव ने सप्तऋषियों को योग का ज्ञान देना शुरू किया था और वे दुनिया के पहले गुरु (आदिगुरु) बने थे.


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By Niraj kumar

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