रटने की प्रवृत्ति के बजाय समझ विकसित करने का करें प्रयास

गया कॉलेज के शिक्षा शास्त्र विभाग में बीएड प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा चलाये जा रहे इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत बच्चों के बीच क्विज कंपीटीशन का आयोजन किया गया.

गया. गया कॉलेज के शिक्षा शास्त्र विभाग में बीएड प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा चलाये जा रहे इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत बच्चों के बीच क्विज कंपीटीशन का आयोजन किया गया. कॉलेज के प्राचार्य प्रो सतीश सिंह चंद्र के दिशा-निर्देश पर शहीद आरक्षी मध्य विद्यालय पुलिस लाइन में बच्चों से कई राउंड प्रश्न बच्चों से पूछे गये. बच्चों को चार ग्रुपों में विभक्त कर दिया गया था. प्रतियोगिता में शिवालिक हाउस प्रथम स्थान पर, उदयगिरी दूसरे स्थान पर तथा अरावली हाउस व नीलगिरी संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहे. सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया. मौके पर प्रशिक्षुओं व विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विभाग अध्यक्ष शिक्षाशास्त्र विभाग डॉ धनंजय धीरज ने कहा कि वर्तमान परिवेश में बच्चों के बीच रटने की प्रवृत्ति हावी हो रही है. वास्तविक जीवन में रटने की विद्या काम नहीं आती है, विद्यार्थियों के अंदर हमें प्रत्येक अवधारणा के प्रति समझ विकसित करनी चाहिए. एनसीएफ 2005 में भी रटने की प्रवृत्ति को न्यूनतम स्तर पर लाने की जबरदस्त वकालत की गयी है. अगर हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति की चर्चा करें तो यह नीति भी विद्यार्थियों में स्पष्ट रूप से रटने की प्रवृत्ति को कम करने की बात करती है. विद्यार्थियों के अंदर विभिन्न पाठ सहायक सामग्री के माध्यम से बच्चों को जटिल प्रकरणों के व्यावहारिक ज्ञान से अवगत कराना है, ताकि कक्षा कक्ष में प्राप्त ज्ञान को विद्यार्थी अपने दैनिक जीवन से जोड़ सकें. मौके पर शिक्षण शास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ अभिषेक कुमार व डॉ धर्मेंद्र कुमार थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: HARIBANSH KUMAR

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >