राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के छह साल: सीयूएसबी कुलपति बोले- उच्च शिक्षा को मिली नई दिशा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के छह वर्ष पूरे होने पर सीयूएसबी के कुलपति ने उच्च शिक्षा में आए सकारात्मक बदलावों पर प्रकाश डाला. एनईपी 2020 ने भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुभवात्मक शिक्षण और बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देकर शिक्षा को अधिक प्रासंगिक बनाया है.

छह वर्ष पूर्व लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा इसके उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं. उक्त वक्तव्य दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने एनईपी 2020 की छठी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक विशेष परिचर्चा में कहीं.

सीयूएसबी के एनईपी प्रकोष्ठ द्वारा अखिल भारतीय शिक्षा समागम (एबीएसएस) 2026 के अंतर्गत "एनईपी 2020 के छह वर्ष : विकसित भारत@2047 के लिए शिक्षा का रूपांतरण" विषय पर इस संवाद का आयोजन किया गया.

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. के. एन. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 नवाचार, समावेशिता, संस्थागत सहयोग तथा शिक्षार्थी-केंद्रित सुधारों के माध्यम से उच्च शिक्षा के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन ला रही है.

अनुभवात्मक शिक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा पर बल

कुलपति ने कहा कि पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसके परिणामस्वरूप उच्च शिक्षा क्षेत्र में दूरगामी सुधार हुए हैं. उन्होंने विशेष रूप से अनुभवात्मक (एक्सपीरियंशियल) शिक्षण को एनईपी 2020 का एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ बताते हुए कहा कि कक्षा में दी जाने वाली शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना भी आवश्यक है, ताकि वे वास्तविक जीवन की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें.

उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा में समाहित करने, बहुभाषी शिक्षा एवं अनुवाद अध्ययन को बढ़ावा देने, लोकतांत्रिक मूल्यों और पर्यावरणीय चेतना को सुदृढ़ करने तथा उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग पर भी बल दिया. कुलपति ने कहा कि इन प्रयासों से उच्च शिक्षा अधिक प्रासंगिक, समावेशी एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनेगी.

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का ध्येय "समुदाय के लिए परिसर" के अनुरूप विश्वविद्यालय अपने आसपास के गांवों को गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से लाभान्वित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है.

कार्यक्रम का संचालन और सहभागिता

विश्वविद्यालय के जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम का समन्वयन एनईपी प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. प्रणव कुमार ने किया, जबकि संचालन एनईपी प्रकोष्ठ के सदस्य सचिव डॉ. आतिश कुमार दाश ने किया.

इस परिचर्चा में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं शोधार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया. प्रतिभागियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले छह वर्षों में एनईपी 2020 ने भारतीय उच्च शिक्षा को कठोर, केवल डिग्री-केंद्रित व्यवस्था से निकालकर एक लचीली, बहुविषयक, प्रौद्योगिकी-सक्षम तथा अनुसंधान-उन्मुख शिक्षा प्रणाली की ओर अग्रसर किया है, जो ज्ञान-आधारित भारत तथा विकसित भारत@2047 की परिकल्पना के अनुरूप है.

सुधारों और भविष्य की प्राथमिकताओं पर चर्चा

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सीयूएसबी ने एनईपी 2020 के प्रमुख प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया है और शैक्षणिक सुधारों एवं छात्र-केंद्रित पहलों के माध्यम से नीति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने वाले अग्रणी संस्थानों में अपनी पहचान बनाई है.

इन उपलब्धियों के आधार पर आयोजित संवाद में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर भी चर्चा की गई. प्रतिभागियों ने बहुविषयक शिक्षा को और मजबूत करने, उद्योग एवं अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने, अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार करने तथा विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप एवं कौशल विकास के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया.

प्राध्यापकों ने एनईपी 2020 के सफल क्रियान्वयन से जुड़े अपने अनुभव एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा किया, वहीं विद्यार्थियों ने रोजगार क्षमता, मार्गदर्शन (मेंटोरिंग), अनुसंधान के अवसरों तथा समग्र व्यक्तित्व विकास से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए. प्रतिभागियों ने परिणाम-आधारित शिक्षा, अधिक शैक्षणिक लचीलापन, अंतर्विषयक सहयोग तथा संस्थागत श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर भी बल दिया.

संवाद का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि सीयूएसबी एनईपी 2020 के सफल क्रियान्वयन को और सशक्त बनाते हुए शिक्षण, अधिगम, अनुसंधान तथा छात्र विकास के क्षेत्रों को और समृद्ध करेगा. परिचर्चा से प्राप्त सुझावों को संकलित कर अखिल भारतीय शिक्षा समागम (एबीएसएस) 2026 के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय परामर्श प्रक्रिया में सीयूएसबी के योगदान के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा.

इसके माध्यम से विश्वविद्यालय विकसित भारत@2047 के राष्ट्रीय संकल्प के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराएगा.


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By Kalendra pratap singh

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