गया मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों का हड़ताल: OPD के बाद इमरजेंसी पर भी ताला, इलाज के बिना लौटे मरीज

Gaya Ji News: गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल (ANMMCH) में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण दूसरे दिन स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. पहले दिन ओपीडी बंद करने के बाद शनिवार को जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवा को भी पूरी तरह ठप कर दिया और मुख्य गेट पर ताला जड़कर धरने पर बैठ गए.

Gaya Ji News: (गया जी कार्यालय से जितेंद्र मिश्रा की रिपोर्ट ) :
मगध प्रमंडल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के दूसरे दिन स्थिति बेहद गंभीर हो गई है. अस्पताल में ओपीडी (OPD) के साथ-साथ अब इमरजेंसी सेवा को भी पूरी तरह से ठप कर दिया गया है. आक्रोशित जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर पर ताला लगाने के बाद इमरजेंसी के मुख्य गेट (मेन गेट) पर भी ताला ठोक दिया और वहीं पर बैनर लगाकर धरने पर बैठ गए. पिछले कई घंटों से दोनों महत्वपूर्ण सेवाएं पूरी तरह बंद हैं. हालांकि, अस्पताल के वार्डों में पहले से भर्ती मरीजों का इलाज सुचारू रूप से चल रहा है, लेकिन नए आने वाले मरीजों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है.

हॉस्टल की कमी और परिसर की बदहाल स्थिति से खफा हैं डॉक्टर

आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि कॉलेज प्रशासन द्वारा उन्हें न्यूनतम बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं कराई जा रही हैं. डॉक्टरों के रहने के लिए कॉलेज के पास पर्याप्त हॉस्टल तक की सुविधा नहीं है, जिसके कारण उन्हें मजबूरन असुरक्षित माहौल में बाहर महंगे किराए पर कमरा लेकर रहना पड़ता है. इससे उनकी पढ़ाई और ड्यूटी दोनों प्रभावित होती है. इसके अलावा अस्पताल परिसर और हॉस्टल जाने वाले मार्ग की हालत बेहद जर्जर है. नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है. डॉक्टरों ने रोष जताते हुए कहा कि हर बार आंदोलन के बाद प्राचार्य और अधीक्षक द्वारा सिर्फ खोखला आश्वासन दिया जाता है, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता. इस बार यह लड़ाई आर-पार की होगी और मांग पूरी होने तक ताला नहीं खुलेगा.

बिना इलाज लौटे 50 से अधिक गंभीर मरीज, समझाने में जुटे आला अधिकारी

इमरजेंसी सेवा ठप होने के कारण दूर-दराज के इलाकों से इलाज कराने आए 50 से अधिक गंभीर मरीजों को बिना चिकित्सा के ही बैरंग लौटना पड़ा है. कई एंबुलेंस अस्पताल के बाहर खड़ी रहीं और मरीजों के परिजन अपनों की जान बचाने के लिए गुहार लगाते दिखे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिले के कई आला प्रशासनिक अधिकारी, अस्पताल अधीक्षक और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचे हैं. अधिकारी लगातार जूनियर डॉक्टरों को समझाने-बुझाने और मरीजों के हित में ताला खोलने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन डॉक्टर अपनी लिखित मांगों और ठोस पहल की जिद पर अड़े हुए हैं. डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि मरीजों की इस दुर्दशा के लिए केवल अस्पताल प्रशासन जिम्मेदार है.

अधीक्षक बोले- कॉलेज स्तर की हैं मांगें, इमरजेंसी सेवा बंद करना अनुचित

इधर, पूरे मामले पर मगध मेडिकल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जूनियर डॉक्टरों की जो भी मांगें हैं, वे सीधे तौर पर अस्पताल से संबंधित नहीं हैं, बल्कि वे कॉलेज प्रशासन और सरकार के स्तर की हैं. कॉलेज प्रबंधन ही उनकी हॉस्टल व बुनियादी जरूरतों की मांग को पूरा कर सकता है. अधीक्षक ने दावा किया कि वरिष्ठ डॉक्टरों के सहयोग से आंतरिक व्यवस्था बहाल रखने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन जूनियर डॉक्टरों द्वारा इमरजेंसी सेवा को पूरी तरह बंद कर देना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है. गंभीर मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ रहा है, जो बेहद चिंताजनक है. बातचीत के जरिए रास्ता निकालने का प्रयास जारी है.

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By Kumarsuryakant

सूर्यकांत कुमार तीन वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. स्थानीय और हाइपरलोकल पत्रकारिता में विशेष अनुभव रखते हैं. कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर का भी व्यावहारिक अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक डिजिटल न्यूज चैनल से की और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करते हुए समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया है. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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