कुशी अमावस्या के दिन से ही दही जमाने की परंपरा, मिथिला में चंद्र चौठ पूजा की तैयारी शुरू

मिथिला में कुशी अमावस्या के दिन कुश उखाड़ने की पुरानी परंपरा निभाई गई. उसर जमीन कम होने से लोगों को कुश खोजने में परेशानी हुई. अब 14 सितंबर को होने वाले चौठ चंद्र पर्व की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं.

चौठ चंद्र पर्व: भाद्र अमावस्या को मिथिला में कुशी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. मिथिला की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में कुश का खास महत्व है. साल भर होने वाले मांगलिक और अमांगलिक कार्यों में इसका इस्तेमाल किया जाता है. मान्यता है कि वर्ष में केवल कुशी अमावस्या के दिन ही कुश उखाड़ा जाता है. शुक्रवार को सुबह से ही लोग कुश की तलाश में घरों से निकल पड़े.

एक दिन ही कुश उखाड़ने की परंपरा

मिथिला में कुशी अमावस्या से जुड़ी कई पुरानी परंपराएं आज भी निभाई जाती हैं. मान्यता के अनुसार जिन लोगों के पिता जीवित हैं, उनके पुत्र इस दिन कुश नहीं उखाड़ते. बताया जाता है कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी लोग इसका पालन करते हैं.

कुश को धार्मिक कार्यों के लिए उपयोगी माना जाता है. पूजा-पाठ से लेकर कई मांगलिक और अमांगलिक संस्कारों में इसकी जरूरत पड़ती है. इसलिए कुशी अमावस्या के दिन लोग पूरे साल के लिए कुश एकत्र कर घर लाते हैं.

उसर जमीन कम हुई तो बढ़ी परेशानी

कुश सामान्य तौर पर ऐसी जमीन पर उगता है, जिसे खेती के लिए उपयोगी नहीं माना जाता. लेकिन समय के साथ ऐसी खाली और उसर जमीन का क्षेत्र कम होता जा रहा है. इसका असर कुश की उपलब्धता पर भी पड़ा है.

शुक्रवार को कुश की तलाश में निकले लोगों को एक गांव से दूसरे गांव तक जाना पड़ा. काफी खोजबीन और मशक्कत के बाद लोगों ने कुश उखाड़ा. इसके बाद उसे घर लाकर साफ करने और निकोनी करने का काम शुरू किया गया.

कुश उखाड़ते ही शुरू हुई चौठ चंद्र की तैयारी

कुशी अमावस्या का संबंध मिथिला के प्रमुख लोकपर्व चौठ चंद्र से भी जुड़ा है. इस दिन कुश उखाड़ने के साथ ही घरों में चौठ चंद्र की तैयारी शुरू हो जाती है. मान्यता और परंपरा के अनुसार चौठ चंद्र में नए कुश का इस्तेमाल कर चंद्रमा की पूजा-अर्चना की जाती है.

कुशी अमावस्या के दिन से ही कई घरों में चौठ चंद्र के लिए दही जमाने की परंपरा भी शुरू हो जाती है. इस वजह से मिथिला के लोगों के लिए यह दिन केवल धार्मिक महत्व का नहीं, बल्कि लोक संस्कृति से भी जुड़ा खास अवसर माना जाता है.

14 सितंबर को मनाया जाएगा चौठ चंद्र

कुशी अमावस्या के बाद अब लोगों की नजर चौठ चंद्र पर्व पर है. इस वर्ष चौठ चंद्र 14 सितंबर को मनाया जाएगा. पर्व को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं. कुश की सफाई और उसे सुरक्षित रखने के बाद लोग पूजा से जुड़ी अन्य तैयारियों में जुटेंगे.

मिथिला की संस्कृति में कुशी अमावस्या और चौठ चंद्र का यह सिलसिला आज भी पुरानी परंपराओं को जीवित रखे हुए है. खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग इन परंपराओं को अपनी अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं.

यह भी पढ़ें:

सड़क बनी, लेकिन जलनिकासी नहीं हुई, सौरिया गांव में फिर बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By सुबोध नारायण पाठक

सुबोध नारायण पाठक पिछले 20 सालों से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ये सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझते हैं और डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स व नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद करते हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >