श्रीमद्भागवत कथा में रुक्मिणी विवाह व सुदामा प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन, भक्ति और सदाचार का मिला संदेश

बक्सर के नया बाजार में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में रुक्मिणी विवाह और सुदामा की मित्रता के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया. कथा व्यास ने दत्तात्रेय के 24 गुरुओं से जीवन की सीख और भागवत कथा श्रवण से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताया.

Buxar News : बक्सर नया बाजार स्थित श्री सीताराम विवाह महोत्सव स्थल में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के सप्तम दिवस पर मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य चरित्रों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश दिया.

रुक्मिणी विवाह और सुदामा प्रसंग ने भावविभोर किया

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का मनोहारी वर्णन किया गया. इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की सच्ची मित्रता, निष्काम भक्ति तथा भगवान की भक्तवत्सलता का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया, जिसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे.

भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं से मिली जीवन की सीख

कथा व्यास ने भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं का प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि यदि मनुष्य में सीखने की ललक हो तो प्रकृति का प्रत्येक तत्व उसका गुरु बन सकता है. उन्होंने जीवन में सदाचार, संयम, विनम्रता और आत्मचिंतन अपनाने की प्रेरणा दी.

भागवत कथा श्रवण से मोक्ष की प्राप्ति

कथा के अंतिम चरण में राजा परीक्षित को श्री शुकदेव जी महाराज द्वारा श्रीमद्भागवत कथा श्रवण कराने तथा कथा के प्रभाव से उन्हें प्राप्त मोक्ष का भावपूर्ण वर्णन किया गया. कथा व्यास ने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मनुष्य के पापों का नाश होता है और उसे भगवान की कृपा के साथ अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है. कथा के समापन पर भगवान की आरती की गई तथा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया.


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By Mritunjay singh

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