Buxar News : सरकार के निर्देश पर शनिवार को प्रखंड के सभी विद्यालयों में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. प्लस टू उच्च विद्यालय तियरा में प्रधानाध्यापक ब्रजेश राय की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अभिभावकों, शिक्षकों और छात्रों ने शिक्षा की गुणवत्ता, नियमित पढ़ाई और बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विस्तार से चर्चा की.
अभिभावकों ने रखी अपनी बात. कुछ विषयों की पढ़ाई पर जताई चिंता
संगोष्ठी में अभिभावक अनिल कुमार सिंह, विश्वामित्र सिंह, राघव सिंह और वीर बहादुर ने कहा कि कुछ विषयों की पढ़ाई नियमित रूप से नहीं हो रही है, जिसमें सुधार की आवश्यकता है. वहीं छात्रों ने भी बताया कि विद्यालय में विषयवार शिक्षक तो हैं, लेकिन समय-सारणी स्पष्ट नहीं होने के कारण कभी-कभी कुछ विषयों की पढ़ाई छूट जाती है.
प्रधानाध्यापक ने दिया जवाब. सभी विषयों की नियमित पढ़ाई का किया दावा
सभी सुझाव और शिकायतें सुनने के बाद प्रधानाध्यापक ब्रजेश राय ने कहा कि विद्यालय में सभी विषयों के शिक्षक उपलब्ध हैं और नियमित रूप से पढ़ाई कराई जाती है. उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय भेजें, क्योंकि यहां पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और विज्ञान आधारित गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है.
मोबाइल से दूरी, किताबों से दोस्ती. अभिभावकों को दी महत्वपूर्ण सलाह
प्रधानाध्यापक ने कहा कि बदलते समय में बच्चे सोशल मीडिया से अधिक जुड़ रहे हैं, जिसका असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है. उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के टीवी और मोबाइल के उपयोग को सीमित करने तथा उन्हें किताबों और पत्रिकाओं से जोड़ने की अपील की. उन्होंने बताया कि अब विद्यालय स्तर पर भी पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित हो सके.
बच्चों की तुलना नहीं, प्रोत्साहन जरूरी. संगोष्ठी में दिया गया सकारात्मक संदेश
बैठक में यह भी कहा गया कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति अलग होती है. इसलिए बच्चों की आपस में तुलना करने के बजाय उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. छोटी-छोटी गलतियों पर डांटने के बजाय उनका आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत है, ताकि वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें.
शिक्षकों और अभिभावकों की रही भागीदारी. शिक्षा में समन्वय पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में बीआरसी प्रतिनिधि प्रकाश कुमार, कमलकांत, आदित्य कुमार, शिक्षक श्यामनारायण ठाकुर, अजीत कुमार सहित अन्य शिक्षक, अभिभावक और स्थानीय लोग मौजूद रहे. संगोष्ठी में विद्यालय और परिवार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया.
