बक्सर में दहेज उत्पीड़न की शिकार महिला का परिवार सखी वन स्टॉप सेंटर की पहल से फिर बसा, पति के साथ हुई विदाई

Buxar News : सखी वन स्टॉप सेंटर ने दहेज उत्पीड़न की शिकार एक महिला को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. महिला के परिवार को फिर से एक साथ लाने के लिए केंद्र ने परामर्श और कानूनी सहायता प्रदान की.

Buxar News : सखी वन स्टॉप सेंटर के प्रयास से दहेज उत्पीड़न की शिकार एक महिला का परिवार फिर से बस गया. सुमन (काल्पनिक नाम) का विवाह 7 मई 2026 को हुआ था. आरोप है कि शादी के आठ दिन बाद से ही उसका पति शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करने लगा. 22 जुलाई को ससुराल वालों ने उसके पिता को बुलाकर उसे मायके भेज दिया.

181 महिला हेल्पलाइन और 112 के माध्यम से पहुंचा मामला

मामला 10 जुलाई 2026 को 181 महिला हेल्पलाइन और 112 के माध्यम से सखी वन स्टॉप सेंटर पहुंचा. पीड़िता के पास निजी मोबाइल फोन नहीं था, जिसके कारण उससे संपर्क करने में परेशानी हो रही थी. केंद्र की टीम ने प्रयास जारी रखा और उसकी माता के माध्यम से पीड़िता से संपर्क स्थापित किया. इसके बाद व्हाट्सएप के माध्यम से लिखित शिकायत प्राप्त कर तत्काल वाद दर्ज किया गया.

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सात बार बुलाकर पीड़िता की काउंसलिंग

केंद्र की टीम ने पीड़िता और उसके परिवार को सात बार बुलाकर भावनात्मक सहयोग एवं परामर्श दिया. 5 अगस्त को जब पीड़िता ने दबाव में आकर केस बंद करने की इच्छा जताई, तब भी काउंसलर ने संवेदनशीलता के साथ उसकी काउंसलिंग की और फॉलो-अप जारी रखा. केंद्र के अनुसार, लगातार की गई काउंसलिंग और फॉलो-अप इस मामले के समाधान में महत्वपूर्ण साबित हुआ.

स्त्रीधन के कानूनी अधिकार की दी जानकारी

3 सितंबर को संयुक्त परामर्श के दौरान काउंसलर ने पीड़िता को उसके स्त्रीधन से जुड़े कानूनी अधिकारों की जानकारी दी. इसके बाद पति ने लिखित रूप से स्वीकार किया कि वह पत्नी के सभी गहने वापस करेगा. गहनों की सूची भी अभिलेख पर ली गई.

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सरपंच और पुलिस की मदद से पति को बुलाया

बाद में जब पति ने केंद्र के फोन कॉल का जवाब देना बंद कर दिया, तो सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम ने स्थानीय सरपंच और पुलिस के सहयोग से उसे कार्यालय में उपस्थित कराया. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मामले के समाधान के लिए परामर्श की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई.

समझौता पत्र के बाद पति के साथ हुई विदाई

18 सितंबर को केंद्र में दोनों पक्षों के बीच विधिवत समझौता पत्र तैयार किया गया. इसमें पति-पत्नी ने एक-दूसरे के सम्मान और देख-रेख का संकल्प लिया. समझौते के बाद सखी वन स्टॉप सेंटर से ही पीड़िता की गरिमामय तरीके से उसके पति के साथ विदाई कराई गई.

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By मृत्युंजय सिंह

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