Buxar News: गायत्री मंत्र की थीम पर बनाया जायेगा विश्वामित्र पार्क : मंत्री

इको पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बक्सर में मृत सोन नहर की जमीन गायत्री मंत्र थीम पर आधारित विश्वामित्र पार्क व रिवर फ्रंट बनाया जायेगा.

बक्सर

. इको पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बक्सर में मृत सोन नहर की जमीन गायत्री मंत्र थीम पर आधारित विश्वामित्र पार्क व रिवर फ्रंट बनाया जायेगा. इसके लिए डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने कि राज्य सरकार हरित आवरण बढ़ाने, जैव विविधता और आर्द्रभूमियों के संरक्षण तथा आम जनता के लिए इको-पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध है.

गुरुवार को अतिथि गृह में प्रेस कॉन्फ्रेस करते हुए जलवायु पर्यावरण मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि रामायण से जुड़े हुए भाग को जीवित करने के उद्देश्य से सोन नहर के जमीन पर गायत्री मंत्र के थीम पर बनेगा विश्वामित्र पार्क. वही बक्सर और भोजपुर में हरियाली, इको-पर्यटन और जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा नया आयाम. उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत भोजपुर वन प्रमंडल द्वारा नहर तट, पथ तट एवं शहरी वानिकी कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 86,500 पौधों का पौधारोपण कार्य किया गया है. वन्य प्राणियों के संरक्षण की दिशा में भी अहम पहल की जा रही है. जिले के नावानगर में रेस्क्यू सेंटर की स्थापना की जा रही है, जो विशेषकर दुर्लभ कृष्ण मृग सहित अन्य वन्यजीवों के उपचार और सुरक्षा के लिए समर्पित होगा. वहीं, आर्द्रभूमियों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. बक्सर के गोकुल जलाशय और भोजपुर के नथमलपुर भांगड जलाशय का विकास व संरक्षण प्रस्तावित है. इको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बक्सर के कमलदाह पोखरा पार्क का सौंदर्यीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है. आगामी वर्ष 2025-26 में भोजपुर स्थित वीर कुंवर सिंह पार्क के विकास कार्य की योजना है. आरा मुख्य नहर और बहियारा मौजा में सोन जैव विविधता पार्क तथा रिवरफ्रंट परियोजना का भी अनुश्रवण किया जा रहा है.गोकुल जलाशय को किया जायेगा संरक्षित : पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डाॅ सुनील कुमार ने गुरुवार को बक्सर जिले के गोकुल जलाशय का निरीक्षण किया. उन्होंने जलाशय की वर्तमान स्थिति, पारिस्थितिकीय संतुलन एवं चल रहे संरक्षण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान मंत्री ने कहा कि गोकुल जलाशय न केवल एक जलस्रोत है, बल्कि यह इलाके के पर्यावरण और जीव-जंतुओं के लिए भी बहुत जरूरी है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जलाशय को साफ-सुथरा रखा जाए, पानी की गुणवत्ता बनी रहे और वहां रहने वाले जीव-जंतुओं को कोई नुकसान न पहुंचे.उन्होंने यह भी बताया कि जलाशय और इसके आस-पास के इलाके को बचाने के लिए आम लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी है. मंत्री ने अधिकारियों को यह भी कहा कि जलाशय के चारों तरफ पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों के लिए अनुकूल माहौल बनाए रखा जाये.निरीक्षण के समय पर्यावरण विभाग और वन विभाग के कई अधिकारी, जिला प्रशासन के पदाधिकारी और अन्य कर्मचारी मौजूद थे. सभी ने मंत्री को जलाशय से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी. विभागीय मंत्री का यह दौरा गोकुल जलाशय को सुरक्षित और बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

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