Buxar News: जिउतिया पर संतान की सलामती को माताओं ने रखा 24घंटे का निर्जला उपवास व्रत

ले में (जीवित्पुत्रिका) जिउतिया का त्योहार रविवार को परंपरागत तरीके से आस्था पूर्वक मनाया गया

बक्सर.

जिले में (जीवित्पुत्रिका) जिउतिया का त्योहार रविवार को परंपरागत तरीके से आस्था पूर्वक मनाया गया. इस अवसर पर अपनी संतानों की सलामती के लिए माताओं ने निर्जला उपवास व्रत रखा और पावन स्नान के बाद मंदिरों में जाकर पूजन अर्चन कर जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा श्रवण किया. तिथि में हेरफेर के भ्रम के कारण जिले में यह पर्व सोमवार को भी मनाया जाएगा.

जिउतिया के अवसर पर स्नान के लिए शहर में व्रतियों का रेला लग गया था. इसके लिए महिला व्रती सुबह से ही पहुंचने लगी थीं और जैसे-जैसे दिन ढलता गया उनकी तादाद बढ़ती गयी. भीड़ के कारण शहर में जाम की स्थिति बन गई थी. पर्व को लेकर महिलाएं तड़के जल्दी में विस्तर छोड़ीं और नित्य क्रिया से निबटने के बाद निर्जला उपवास के संकल्प के साथ व्रत का अनुष्ठान कीं. इसके बाद दोपहर में गंगा घाटों पर जाकर पावन डुबकी लगाईं और आचार्यों के सान्निध्य में पूजन-अर्चन कर जीवितत्पुत्रिका व्रत की कथा सुनीं. कथा सुनने के बाद अन्न व द्रव्य आदि का दान कर अपनी संतानों के सुखी एवं दीर्घ जीवन की कामनाएं की. आचार्यों के मुताबिक जीवित्पुत्रिका व्रत अश्विन मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. इस व्रत का अनुष्ठान करने वाली महिला व्रतियों की संतानों की लंबी आयु प्राप्त होती है तथा उनके जीवन में अन्न व धन आदि की कमी नहीं होती है.

गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़

जिउतिया के स्नान के लिए व्रतियों की भीड़ उमड़ गई थी. इसके लिए शहर व बक्सर जिला के अलावा बिहार एवं उतर प्रदेश के विभिन्न जिलों से व्रती पहुंचे थे. स्थानीय स्टेशन पर आने वाली तकरीबन प्रत्येक ट्रेनों से महिलाओं का जत्था उतर रहा था और सीधे रामरेखाघाट पर पहुंच रहा था. रामरेखाघाट पर भीड़ का हाल यह था कि वहां तिल रखने तक की जगह नहीं बची थी और घाट से आने-जाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही थी. शहर की सड़कों का हाल भी बेहाल था. पैदल चल रहीं महिलाओं एवं वाहनों की कतार से जाम की स्थिति बन गई थी.

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By RAVIRANJAN KUMAR SINGH

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