Buxar News : नई बाजार स्थित श्री सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम में साकेतवासी संत श्री नेहनिधि नारायण दास भक्तमाली उपाख्य मामाजी महाराज की प्रेरणा से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस रविवार को श्रद्धालु भक्तिरस में सराबोर हो गए. कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्मोत्सव और बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन सुन श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे.
दशम स्कंध को बताया भागवत का हृदय
संत भक्तमाली जी के कृपापात्र श्री श्याम चरण दास जी महाराज ने दशम स्कंध की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत का दशम स्कंध संपूर्ण भागवत का हृदय है. इसमें भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य, उनकी दिव्य लीलाओं और भक्तों पर बरसने वाली असीम कृपा का अद्भुत वर्णन मिलता है. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार धर्म की स्थापना, अधर्म के विनाश और भक्तों के कल्याण के लिए हुआ.
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से भावविभोर हुए श्रद्धालु
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के कारागार में प्राकट्य, वसुदेव द्वारा आधी रात यमुना पार कर गोकुल पहुंचाने, नंदोत्सव, पूतना उद्धार, शकटासुर और तृणावर्त वध, माखन चोरी तथा ग्वाल-बालों के साथ खेली गई बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया. कथा सुनकर श्रद्धालु "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के जयघोष और भजनों पर झूम उठे.
सेवा, प्रेम और समर्पण का दिया संदेश
श्री श्याम चरण दास जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं निष्कपट प्रेम, सरलता, सेवा और पूर्ण समर्पण का संदेश देती हैं. उन्होंने कहा कि जो श्रद्धा और विश्वास के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करता है, उसके जीवन में ईश्वर की कृपा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है.
आरती और नंदोत्सव से गूंजा कथा स्थल
कथा के समापन पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. श्रद्धालुओं ने आरती, पुष्पवर्षा और भजन-कीर्तन के साथ नंदोत्सव मनाया, जिससे पूरा कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा.
