Buxar News: शहर में बीमारियां फैला रहे कचरा प्वाइंट

शहर को स्मार्ट सिटी बनवाने की मुहिम में जुटा नगर पर्षद जनता की बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं करा पा रही है. सोमवार से नवरात्र प्रारंभ हो गया है.

बक्सर

. शहर को स्मार्ट सिटी बनवाने की मुहिम में जुटा नगर पर्षद जनता की बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं करा पा रही है. सोमवार से नवरात्र प्रारंभ हो गया है. मगर शहर की सड़कों पर सुबह 12 बजे तक कचरे का अंबार लगा रहता है. सुबह में पूजा-पाठ करने वाले लोगों को कचरे से उठ रही गंदगी से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. शहर की साफ-सफाई की हालत किसी से छिपी नहीं है. सड़कों पर जगह-जगह लगे कचरे का ढेर तरह-तरह की बीमारियां फैला रही हैं. शहर के कचरा प्वाइंट से उठ रही दुर्गंध के कारण आस-पास के लोगों को जीना दुश्वार है. हालांकि बक्सर शहर देश भर में स्वच्छता रैंकिंग में पीछे छूट गया है. जिसके कारण बक्सर को स्वच्छ रखने की पहल पर फिर एक बार सवाल खड़ा हो गया है. बक्सर शहर के बाहर डंपिंग जोन नहीं होने के कारण शहर पूरी तरह कूड़ों के ढ़ेर पर बसा हुआ है. लापरवाही की हद यह है कि करोड़ों की लागत से चल रहे केंद्र सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी योजना गंगा स्वच्छता अभियान भी की धार को बक्सर कमजोर कर रहा है. नहर के मार्ग से कूड़े गंगा में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे गंगा हर रोज प्रदूषित हो रही है. ताड़का नाले के सहारे शहर की गंदगी गंगा में गिरती है. शहर में कोई ऐसी जगह नहीं है, जहां कूड़ों का अंबार नहीं लगता है. बाइपास रोड में कूड़े का ढेर लगे रहने के कारण वातावरण प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है. इस संबंध में जब नगर परिषद के कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार से बातचीत की गयी तो उन्होंने अपने मोबाइल से स्वच्छता पदाधिकारी रवि कुमार से बात करायी. रवि कुमार ने कहा कि इस संबंध में मुझे भी जानकारी मिली है. सफाई एजेंसी को इस बारे में पत्र लिखा जा जा रहा है. सफाई को लेकर नए सिरे से सफाई एजेंसी को दिशा निर्देश जारी किया गया है.

एक करोड 16 लाख हर माह खर्च फिर भी नहीं सुधर रही रैंकिंगशहर की साफ-सफाई को लेकर हर माह करीब एक करोड़ 16 लाख रुपये खर्च होता है. इनमें डोर-टू-डोर कूड़ा उठाव और शहर की गली एवं सड़कों की साफ-सफाई की जिम्मेवारी एनजीओ को दी गयी है. बावजूद इसके डोर-टू-डोर कचरा प्रबंधन का कार्य बेहतर नहीं होता है. शहर के अधिकांश वार्ड में डोर-टू-डोर कचरा उठाव में दो कर्मी लगाये गये हैं. लेकिन, किसी भी वार्ड में लगभग पांच सौ से अधिक घर होने के कारण ये कर्मी हर रोज घरों तक नहीं पहुंच पाते हैं. ऐसे में गृह स्वामी घर के कचरे को सड़क पर फेकने के लिए विवश हो जाता है.

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