Buxar News : जिले में उफनाई गंगा का तेवर अब नरम पड़ने लगा है, जिससे लोगों को राहत की उम्मीद जगी है. गंगा का पानी खतरे के निशान को पार करने के बाद शुक्रवार की रात दो बजे 60.55 मीटर के उच्चतम बिंदु पर पहुंचकर स्थिर हो गया था. इसके बाद शनिवार की दोपहर दो बजे से जलस्तर में कमी आने का सिलसिला शुरू हुआ. हालांकि, बाढ़ प्रभावित इलाकों में अभी संकट बरकरार है.
उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद घटने लगा जलस्तर
ग्रामीणों के मुताबिक, बाढ़ के पानी से गंगा और उसकी सहायक नदियों के कछारी इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. शनिवार की दोपहर दो बजे तक गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 60.32 मीटर से 23 सेंटीमीटर ऊपर 60.55 मीटर पर स्थिर रहा. इसके बाद धीरे-धीरे पानी नीचे उतरना शुरू हुआ. शनिवार की शाम छह बजे गंगा का जलस्तर 60.48 मीटर दर्ज किया गया.
छह प्रखंडों के तटवर्ती गांव बाढ़ से प्रभावित
बाढ़ प्रभावित चौसा, बक्सर, इटाढ़ी, सिमरी, चक्की और ब्रह्मपुर प्रखंडों के तटवर्ती इलाकों में कई गांवों का सड़क संपर्क भंग हो गया है. खरीफ की फसलें पानी में डूब गई हैं और पशु चारे का संकट भी गहराने लगा है. गंगा का पानी बक्सर-कोइलवर तटबंध के पास पहुंच गया है. इससे तटबंध के अंदर बसे गांवों और टोलों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
सहायक नदियों ने बढ़ाई ग्रामीणों की परेशानी
गंगा के उफान से रामरेखाघाट स्थित विवाह मंडप के ऊपरी हिस्से तक पानी पहुंच गया है. शहर के अन्य प्रमुख घाट भी डूबे हुए हैं. इसके कारण गंगा में स्नान करने वालों की संख्या कम हो गई है. नावों का परिचालन भी पूरी तरह ठप है, जिससे मछुआरे भी मछली पकड़ने से परहेज कर रहे हैं.
कर्मनाशा, ठोरा, भैंसही और धर्मावती समेत अन्य सहायक नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में भी बाढ़ का असर है. सड़क संपर्क भंग होने से आवागमन या तो ठप है या लोगों को रास्ता बदलकर जिला और प्रखंड मुख्यालय पहुंचना पड़ रहा है. इन नदियों का पानी तट की सीमा को पार कर खेतों और गांवों में घुस गया है, जिससे सैकड़ों एकड़ में लगी धान और मक्के की फसल बर्बाद हो रही है.
ठोरा के उफान से कई गांवों का संपर्क बाधित
ठोरा नदी के उफान के चलते सदर प्रखंड के करहंसी, जरिगांवा, इजरी श्रीराम, गोविंदपुर, लरई कोड़रवा समेत अन्य गांवों के लोगों का आवागमन बाधित है. सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल डूब गई है. इसी तरह इटाढ़ी प्रखंड के अतरौना और सिकटौना गांवों का भी प्रखंड मुख्यालय से सड़क संपर्क टूट गया है. धान के खेतों में पानी बह रहा है.
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चौसा-मोहनिया सड़क पर दो से तीन फीट पानी
चौसा प्रखंड के बनारपुर, सकरौल समेत आसपास के अन्य गांवों में भी जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. चौसा-मोहनिया सड़क पर करीब ढाई से तीन फीट पानी बह रहा है. बाढ़ का पानी कई गांवों में प्रवेश कर गया है, जिससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है.
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दियारा इलाकों में अब भी गंभीर स्थिति
जिले के सिमरी, चक्की और ब्रह्मपुर के दियारा इलाकों में स्थिति गंभीर बनी हुई है. कई गांव टापू में तब्दील हो गए हैं. सड़कों पर नावों का परिचालन हो रहा है और कई जगहों पर सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया है. ग्रामीणों के अनुसार, लोग बच्चों और मवेशियों के साथ ऊंचे बांधों और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं. दियारा क्षेत्रों में हजारों की आबादी पर बाढ़ के संकट का खतरा अभी भी मंडरा रहा है.
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