बक्सर: एथनॉल नीति बदलाव से उद्योग संकट में, निवेशकों ने सरकार पर उठाए गंभीर सवाल

बिहार की एथेनॉल नीति में बदलाव से उद्योग संकट में हैं। भारत प्लस ग्रुप के सीएमडी अजय सिंह ने निवेश और रोजगार पर मंडराते खतरे को लेकर सरकार से मदद मांगी है।

Nawanagar Ethanol Industry Crisis : नावानगर में बिहार सरकार की औद्योगिक प्रोत्साहन नीति पर भरोसा कर सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश करने वाले एथनॉल उद्योग अब गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. बक्सर जिले के नावानगर औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित एथनॉल प्लांट से जुड़े उद्योगपति अजय कुमार सिंह ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वर्ष 2025 में एथनॉल आवंटन नीति में बदलाव के बाद स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है. उनका आरोप है कि इस बदलाव के कारण पहले से अनुबंधित प्लांटों का आवंटन करीब 50 प्रतिशत तक घटा दिया गया, जिससे उद्योगों के संचालन पर सीधा असर पड़ा है.

अजय कुमार सिंह, जो भारत प्लस ग्रुप के सीएमडी हैं, ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2021 में बिहार सरकार की नीति से प्रेरित होकर नावानगर में 100 केएलपीडी क्षमता का एथनॉल प्लांट स्थापित किया था. इस परियोजना में भारी निवेश किया गया और सरकार की ओर से मिले आश्वासन के आधार पर आगे की योजना तैयार की गई थी.

बड़े समझौते के बाद शुरू हुई थी सप्लाई

उन्होंने जानकारी दी कि जनवरी 2022 में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के साथ 10 वर्षों का दीर्घकालिक खरीद समझौता हुआ था. इसके बाद मई 2024 से एथनॉल की नियमित आपूर्ति शुरू कर दी गई. उस समय उद्योग को लेकर काफी उम्मीदें थीं और इसे बिहार के औद्योगिक विकास के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा था.

इस प्लांट के शुरू होने से 600 से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिला, जबकि राज्यभर के करीब 12 एथनॉल प्लांटों से लगभग 8 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला. इसके अलावा मक्का किसानों को भी बेहतर कीमत मिलने लगी थी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली.

नीति बदलाव से बिगड़ी स्थिति

अजय कुमार सिंह का कहना है कि वर्ष 2025 में सरकार ने एथनॉल आवंटन नीति में बदलाव कर दिया. इसके तहत बिना दीर्घकालिक खरीद समझौते वाले नए प्लांटों को भी आपूर्ति का आवंटन मिलने लगा. वहीं पहले से अनुबंधित उद्योगों का हिस्सा कम कर दिया गया. इस फैसले का सीधा असर उत्पादन और बिक्री पर पड़ा.

उन्होंने बताया कि वर्तमान में बिहार के अधिकांश एथनॉल प्लांट आधी क्षमता पर चल रहे हैं. इससे कर्मचारियों के वेतन, बैंक ऋण की ईएमआई और अन्य खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है. कई उद्योग आर्थिक दबाव में आ गए हैं और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है.

सरकार और कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

इस मामले को लेकर उद्योगपतियों ने बिहार सरकार, पेट्रोलियम मंत्रालय और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के समक्ष अपनी बात रखी है. इसके साथ ही पटना हाईकोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया गया है. उद्योगपतियों का कहना है कि वे न्याय और स्थिर नीति की मांग कर रहे हैं ताकि उनका निवेश सुरक्षित रह सके.

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में औद्योगिक उपयोग के लिए एथनॉल बिक्री की अनुमति तो दी गई है, लेकिन जरूरी तकनीकी संशोधन अभी तक लंबित है. इसके कारण अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग नहीं हो पा रहा है और नुकसान बढ़ता जा रहा है.

सरकार से त्वरित निर्णय की मांग

अजय कुमार सिंह ने सरकार से अपील की है कि पहले से अनुबंधित एथनॉल उद्योगों को प्राथमिकता दी जाए और लंबित नीतिगत फैसलों पर जल्द कार्रवाई हो. उनका कहना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों, रोजगार और बिहार में भविष्य के निवेश पर भी पड़ेगा.


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By Triloki chaubey

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