Buxar News : डुमरांव स्थानीय विधायक राहुल कुमार सिंह ने शनिवार को डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने अस्पताल की साफ-सफाई, दवा उपलब्धता, वार्डों और नवजात शिशुओं के उपचार के लिए स्थापित एमएनसीयू (मदर एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट) का जायजा लिया. निरीक्षण में अस्पताल के शौचालयों की बदहाल स्थिति सामने आने पर उन्होंने तत्काल सुधार के निर्देश दिए.
साफ-सफाई व्यवस्था पर जताई नाराजगी
निरीक्षण के दौरान विधायक ने अस्पताल के वार्ड और शौचालयों का निरीक्षण किया. कई जगहों पर साफ-सफाई और रखरखाव की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से कहा कि मरीजों और उनके परिजनों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए तथा सफाई व्यवस्था में तत्काल सुधार सुनिश्चित किया जाए.
20 बेड का MNCU, लेकिन डॉक्टरों की कमी बनी बड़ी बाधा
एमएनसीयू वार्ड का निरीक्षण करते समय विधायक ने पाया कि आधुनिक मशीनों और 20 बेड से सुसज्जित यूनिट पर्याप्त चिकित्सकों के अभाव में पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रही है. प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. शिव कुमार चौधरी ने बताया कि यूनिट के सुचारू संचालन के लिए कम से कम चार डॉक्टरों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल एक चिकित्सक उपलब्ध हैं. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक कुमार सप्ताह में केवल सोमवार और शुक्रवार को ही सेवाएं देते हैं.
स्वास्थ्य विभाग से डॉक्टर और कर्मी उपलब्ध कराने का भरोसा
प्रभारी उपाधीक्षक ने बताया कि डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती के लिए विभाग को कई बार पत्र भेजा गया है, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई. इस पर विधायक ने अस्पताल प्रशासन को दोबारा विभाग को पत्र भेजने का निर्देश दिया और कहा कि वह स्वयं भी स्वास्थ्य विभाग के समक्ष इस मुद्दे को उठाकर आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे. उन्होंने कहा कि आधुनिक भवन और मशीनें तभी उपयोगी होंगी, जब पर्याप्त डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध होंगे.
मरीजों से मिले विधायक, दवा व्यवस्था की भी ली जानकारी
निरीक्षण के दौरान विधायक ने अस्पताल में भर्ती मरीजों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और दवाओं के स्टॉक की जानकारी ली. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए. अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 20 प्रसव होते हैं, ऐसे में गंभीर नवजातों के इलाज के लिए एमएनसीयू में डॉक्टर, जीएनएम और वार्ड बॉय की शीघ्र तैनाती आवश्यक बताई गई.
