बक्सर: ब्रह्मपुर डिग्री कॉलेज का उद्घाटन फीका, 17 पंचायतों में लाखों की आबादी के बावजूद नहीं जुटी भीड़, नामांकन भी रहा कम

बक्सर के ब्रह्मपुर में दशकों से प्रतीक्षित डिग्री कॉलेज का उद्घाटन तो हो गया, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और प्रचार की भारी कमी के कारण यह भव्य आयोजन फीका रहा. उद्घाटन के दिन आम जनता और छात्रों में उत्साह का अभाव दिखा, जिससे पूरे कार्यक्रम की औपचारिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं.

Brahmpur Degree College Inauguration : बक्सर के ब्रह्मपुर नगर पंचायत समेत आसपास की 17 पंचायतों के लिए जिस डिग्री कॉलेज का सपना दशकों से देखा जा रहा था, उसका उद्घाटन आखिरकार बुधवार को हो गया. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नवसृजित ब्रह्मपुर डिग्री कॉलेज का ऑनलाइन उद्घाटन किया, लेकिन जिस ऐतिहासिक दिन को उत्सव में बदलना चाहिए था, वह प्रशासनिक उदासीनता और प्रचार-प्रसार की भारी कमी के कारण फीका नजर आया. उद्घाटन के मौके पर न तो आम लोगों की भीड़ दिखी और न ही छात्रों में कोई खास उत्साह, जिससे पूरे आयोजन पर सवाल खड़े हो गए हैं.

ब्रह्मपुर प्रखंड क्षेत्र की सवा लाख से अधिक आबादी लंबे समय से एक स्थानीय डिग्री कॉलेज की मांग कर रही थी. इस कॉलेज के शुरू होने से छात्रों को बाहर जाने की मजबूरी कम होने की उम्मीद थी. लेकिन उद्घाटन के दिन जिस तरह का माहौल दिखा, उसने इस उम्मीद पर शुरुआती तौर पर ही सवाल खड़े कर दिए.

Buxar News : लाखों की आबादी, लेकिन सूचना नहीं पहुंची

इतने बड़े क्षेत्र में कॉलेज खुलने जैसी बड़ी घटना के बावजूद प्रचार-प्रसार लगभग ना के बराबर रहा. न तो कहीं बड़े पैमाने पर होर्डिंग लगाए गए और न ही स्थानीय स्तर पर लोगों को जानकारी दी गई. यहां तक कि कई अभिभावकों और छात्रों को यह भी पता नहीं था कि बुधवार को कॉलेज का उद्घाटन होने वाला है.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने इस पूरे कार्यक्रम को केवल औपचारिकता की तरह लिया. सूचना तंत्र की कमजोरी के कारण आम जनता, बुद्धिजीवियों और छात्र संगठनों तक खबर पहुंच ही नहीं सकी. यही वजह रही कि उद्घाटन स्थल पर अपेक्षित भीड़ नहीं जुट पाई और कार्यक्रम बेजान सा नजर आया.

Education News : बुद्धिजीवियों की दूरी ने बढ़ाई चिंता

उद्घाटन समारोह में सबसे बड़ी कमी स्थानीय बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों की गैरमौजूदगी रही. ब्रह्मपुर और आसपास के इलाकों में कई सेवानिवृत्त शिक्षक, प्रोफेसर और समाजसेवी हैं, जिन्होंने वर्षों तक कॉलेज की मांग उठाई थी.

लोगों का मानना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को मजबूत बनाने में स्थानीय समाज की भागीदारी बेहद जरूरी होती है. यदि शुरुआत से ही प्रबुद्ध वर्ग को साथ नहीं जोड़ा जाएगा, तो कॉलेज और समाज के बीच संवाद कमजोर पड़ सकता है. कई लोगों ने कहा कि अगर उन्हें आमंत्रित किया जाता, तो वे कॉलेज की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दे सकते थे.

Brahmpur College Opening : नामांकन कम, परिसर में सन्नाटा

प्रचार की कमी का असर नामांकन पर भी साफ दिखा. कॉलेज में कला संकाय के छह विषयों की पढ़ाई शुरू होने के बावजूद अब तक केवल 92 छात्रों ने ही नामांकन कराया है. इतनी बड़ी आबादी के हिसाब से यह संख्या काफी कम मानी जा रही है.

उद्घाटन के दिन कॉलेज परिसर में न तो कोई उत्सव जैसा माहौल दिखा और न ही छात्रों की भीड़. परिसर में सन्नाटा और बिखराव साफ महसूस किया गया. इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि कॉलेज प्रशासन अभी तक लोगों तक अपनी बात सही तरीके से नहीं पहुंचा पाया है.

खानापूर्ति बनकर रह गया ऐतिहासिक दिन

कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त निहारिका छवि, प्रभारी प्राचार्या डॉ वीणा कुमारी, सीनेटर प्रोफेसर बलिराज ठाकुर और बीडीओ सोनू कुमार समेत कई अधिकारी मौजूद थे. बावजूद इसके, जनता की भागीदारी नहीं होने से यह आयोजन केवल औपचारिकता बनकर रह गया.

स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इतने बड़े अवसर को बेहतर तरीके से मनाया जा सकता था. उनका मानना है कि प्रशासन ने इस ऐतिहासिक पहल को केवल फीता काटने तक सीमित कर दिया.

कॉलेज की मौजूदा स्थिति भी कई सवाल खड़े करती है. महज पांच कमरों, जिनमें एक कार्यालय के लिए है, और पांच प्रतिनियुक्त शिक्षकों के भरोसे छह विषयों की पढ़ाई शुरू की गई है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या कॉलेज प्रबंधन आने वाले दिनों में स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों को साथ जोड़कर इस संस्थान को मजबूत बना पाता है या नहीं.

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Author: Santosh Kant

Published by: Ragini Sharma

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