बक्सर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया हरितालिका तीज, सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत

Buxar News : बक्सर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में हरितालिका तीज का पर्व पूरे उल्लास से मनाया गया. सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए 24 घंटे का कठिन निर्जला व्रत रखा. गंगा घाटों पर स्नान के बाद महिलाओं ने सोलह शृंगार कर विधि-विधान से शिव-गौरी की पूजा-अर्चना की.

Buxar News : सिद्धाश्रम की पावन भूमि बक्सर समेत जिले के ग्रामीण इलाकों में सोमवार को अखंड सौभाग्य का महापर्व हरितालिका तीज पूरी श्रद्धा, निष्ठा और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया. इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना को लेकर 24 घंटे का कठिन निर्जला व्रत रखा. महिलाओं ने माता गौरी और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने पति के दीर्घ जीवन और सलामती की कामना की.

गंगा घाटों पर स्नान के बाद महिलाओं ने की पूजा-अर्चना

तीज पर्व को लेकर सुबह से ही प्रमुख गंगा घाटों पर व्रती महिलाओं की भीड़ रही. महिलाओं ने गंगा में स्नान कर नए वस्त्र धारण किये और भगवान शिव एवं माता गौरी की आराधना की. इसके बाद अपने घरों और आसपास के मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना की. पर्व को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पूरे दिन भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा.

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सोलह शृंगार कर महिलाओं ने की सामूहिक पूजा

हरितालिका तीज के अवसर पर महिलाओं ने सुहाग का प्रतीक माने जाने वाले सोलह शृंगार किये और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की. व्रतियों ने भगवान शिव और माता पार्वती का दर्शन कर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल और शमी पत्र अर्पित किये. वहीं माता गौरी को सुहाग की सामग्री अर्पित कर विधि-विधान से पूजा संपन्न की गयी.

पर्व को लेकर शहर के पौराणिक रामरेखा घाट स्थित श्रीरामेश्वर मंदिर और चरित्रवन स्थित श्रीनाथ बाबा मंदिर समेत जिले के तमाम छोटे-बड़े शिवालयों में व्रतियों की भीड़ उमड़ पड़ी. मंदिरों में देर तक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान का दौर चलता रहा.

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आचार्यों के सानिध्य में सुनी तीज व्रत की पौराणिक कथा

पूजन-अर्चन के बाद व्रती महिलाओं ने आचार्यों के सानिध्य में हरितालिका तीज व्रत की पौराणिक कथा का श्रवण किया. कथा के अनुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती को इस कठिन व्रत के महत्व और उनके तप से जुड़ी कथा सुनायी थी. कथा श्रवण के बाद महिलाओं ने पारंपरिक तीज के लोकगीत गाये और भगवान शिव एवं माता गौरी से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा.

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By ओंकार नाथ मिश्रा

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