कैबिनेट फैसलों की अनदेखी पर भड़के बक्सर सांसद सुधाकर सिंह, सीएम सम्राट को लिखा पत्र

Buxar News: बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर विभागीय अधिकारियों पर कैबिनेट फैसलों की अनदेखी, भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने स्थानीय ठेकेदारों को बाहर करने का भी मुद्दा उठाया है.

Buxar News(ओंकार नाथ मिश्र): बिहार सरकार के कैबिनेट फैसलों को ठेंगा दिखाने वाले बेलगाम अधिकारियों के खिलाफ बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने सीधे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. सांसद ने सीधे तौर पर विभागीय अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है. कैबिनेट के फैसले को फाइलों में दफन करने की साजिश सांसद ने पत्र में याद दिलाया कि बीते 29 अप्रैल को कैबिनेट की दूसरी बैठक में सरकार ने जोर-शोर से घोषणा की थी कि बिहार के स्थानीय ठेकेदारों को बढ़ावा देने के लिए 50 करोड़ रुपये तक के टेंडरों में उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी. लेकिन अधिकारियों ने इस जनहितैषी फैसले का मखौल बना दिया है.

लोकल ठेकेदारों को बाहर कर मुंबई-गुजरात वालों को मलाई खिलाने का खेल

सांसद सुधाकर सिंह ने बेहद तल्ख लहजे में सवाल दागा है कि आखिर बिहार के अधिकारियों को मुंबई और गुजरात के बड़े सिंडिकेट से इतना क्या मोह है? उन्होंने खुलासा किया कि ग्रामीण कार्य विभाग ने कैमूर समेत राज्य के कई हिस्सों में 20 से 30 करोड़ रुपये के टेंडरों को सिर्फ इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि उनकी टेक्निकल और फाइनेंशियल बिडिंग पूरी हो चुकी थी और वे स्थानीय ठेकेदारों को मिलने वाले थे.

टेंडरों को मिलाकर बनाया जा रहा है महा-टेंडरपथ

निर्माण विभाग (RCD) के कारनामों पर चोट करते हुए सांसद ने बताया कि अधिकारियों ने एक नया खेल शुरू किया है. 11 मई 2026 को विभाग ने 30 से 40 करोड़ रुपये की लागत वाली 5 अलग-अलग सड़कों के टेंडरों को आपस में मिलाकर 100 से 150 करोड़ रुपये का एक बड़ा ‘महा-टेंडर’ बना दिया. ऐसा जानबूझकर इसलिए किया गया ताकि बिहार के छोटे और स्थानीय ठेकेदार इस रेस से बाहर हो जाएं और बाहरी राज्यों की बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके.

सुधाकर सिंह की दो टूक: ‘भाषणबाजी बंद करे सरकार, अधिकारियों पर हो उच्चस्तरीय जांच

बक्सर सांसद ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री से मांग की है कि ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा रद्द किए गए टेंडरों और पथ निर्माण विभाग द्वारा जारी किए गए इन संयुक्त टेंडरों की तुरंत उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि अगर भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ हो जाएगा कि सरकार की घोषणाएं सिर्फ ‘चुनावी भाषण’ और ‘राजनीतिक स्टंट’ थीं, और वर्तमान सरकार असल में मुंबई-गुजरात के पूंजीपतियों के इशारे पर काम कर रही है.

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Published by: Suryakant Kumar

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