Buxar News (डुमरांव से सुजीत कुमार ओझा की रिपोर्ट): बक्सर जिले के चौगाईं गांव के युवा फुटबॉलर आशुतोष कुमार सिंह ने भारतीय फुटबॉल जगत में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपने पहले ही प्रोफेशनल प्रयास में आई-लीग 3 का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है. सीमित संसाधनों और कठिन संघर्ष के बीच मिली इस सफलता ने न केवल उनके गांव और जिले बल्कि पूरे बिहार का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है.
आशुतोष की यह उपलब्धि बिहार फुटबॉल के लिए बेहद खास मानी जा रही है. कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले आशुतोष अब प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं. उनकी कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इरादे और निरंतर मेहनत के सामने आर्थिक अभाव भी बाधा नहीं बन सकते.
साधारण परिवार से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले आशुतोष के पास न अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं थीं और न ही बड़े खेल संस्थानों का सहयोग. बावजूद इसके उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया. बचपन से फुटबॉल के प्रति जुनून रखने वाले आशुतोष ने लगातार अभ्यास और संघर्ष के दम पर खुद को साबित किया. उनकी प्रतिभा को सबसे पहले पुराना भोजपुर निवासी कोच मनीष शर्मा ने पहचाना. मनीष शर्मा ने उन्हें खेल की बारीकियां सिखाने के साथ-साथ आत्मविश्वास भी दिया. यही शुरुआती प्रशिक्षण आगे चलकर उनके करियर की मजबूत नींव साबित हुआ.
फुटबॉल क्लब बनारस के साथ दिखाया दम
वर्तमान में कोच विवेक सिंह के मार्गदर्शन में खेल रहे आशुतोष ने फुटबॉल क्लब बनारस की ओर से शानदार प्रदर्शन किया. पूरे टूर्नामेंट में उनके बेहतरीन खेल ने टीम को मजबूती दी और आखिरकार क्लब ने आई-लीग 3 डिवीजन का खिताब अपने नाम कर लिया. पहले ही प्रयास में मिली इस बड़ी सफलता ने आशुतोष को बिहार के उभरते फुटबॉल सितारों की कतार में ला खड़ा किया है.
डुमरांव पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत
ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद डुमरांव आगमन पर आशुतोष कुमार सिंह का भव्य स्वागत किया गया. डुमरांव भाजपा क्रीड़ा मंच के सह संयोजक रोहित सिंह, पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी एवं पुराना भोजपुर के पूर्व मुखिया प्रतिनिधि इस्लाम अंसारी, समाजसेवी श्रीकांत ओझा समेत कई गणमान्य लोगों ने उन्हें सम्मानित कर शुभकामनाएं दीं. इस मौके पर शनि ओझा, प्रेम शर्मा, अभय शर्मा, आकाश ओझा, विशाल गुप्ता, विकास पासवान, विकास शर्मा, शुकेश राम, जय कुमार और करन चौधरी सहित कई समर्थकों और साथियों ने खुशी जाहिर करते हुए उनकी उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए गौरव बताया.
मां और बहनों को दिया सफलता का श्रेय
अपनी सफलता पर आशुतोष ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में उनकी मां और दोनों बड़ी बहनों ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया. परिवार का सहयोग ही उनके संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत बना. उन्होंने अपने बचपन के दोस्तों उज्ज्वल और आशुतोष ओझा का भी विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि संघर्ष के दिनों में उन्होंने हमेशा साथ दिया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. आज आशुतोष कुमार सिंह की सफलता सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि उस विश्वास और संघर्ष की कहानी है जो यह संदेश देती है कि छोटे गांवों से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है.
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