Buxar News: बेटियों की सफलता जब परचम लहराती है तो पूरे परिवार के साथ-साथ गांव और जिले का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. ऐसा ही गर्व का क्षण बिहार के बक्सर जिले के ब्रह्मपुर प्रखंड के तेज पाण्डेयपुर (निमेज) गांव में देखने को मिला, जहां के निवासी राम सूजान पांडे की बेटी कमलाक्षी कुमारी का चयन सीबीआई विभाग में अभियोजन अधिकारी के पद पर हुआ है.
सिविल सेवा में 11वां रैंक, पांडे परिवार और गांव में खुशी की लहर
जैसे ही सिविल सेवा परीक्षा में 11वां रैंक आने की खबर मिली, पांडे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई. इस सफलता से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरा गांव और क्षेत्र उत्साहित है. अधिवक्ता संघ से लेकर न्यायिक पदाधिकारियों तक ने कमलाक्षी को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
पिता न्यायिक पदाधिकारी, घर में मिला पढ़ाई और न्याय का माहौल
कमलाक्षी कुमारी के पिता राम सूजान पांडेय स्वयं न्यायिक पदाधिकारी हैं और वर्तमान में कटिहार जिले के बरसोई कोर्ट में पदस्थापित हैं. घर में शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई और न्याय के प्रति सम्मान का माहौल रहा, जिसका सकारात्मक असर कमलाक्षी के करियर पर भी पड़ा.
सरस्वती शिशु मंदिर से BHU और कोर्ट प्रैक्टिस तक का सफर
कमलाक्षी की प्रारंभिक शिक्षा बक्सर के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर से हुई, जहां उन्होंने 10वीं की परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने महिला महाविद्यालय, भभुआ (कैमूर) से 12वीं की पढ़ाई पूरी की और फिर प्रतिष्ठित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से कानून (LLB) की डिग्री हासिल की. एलएलबी के बाद उन्होंने व्यवहार न्यायालय, बक्सर में टेबल नंबर 32 पर सीनियर अधिवक्ता अरुण कुमार सिंह के नेतृत्व में प्रैक्टिस शुरू की.
मेधावी वकील से CBI अफसर तक का प्रेरणादायक सफर
सीनियर अरुण कुमार सिंह ने बताया कि कमलाक्षी एक मेधावी और जुझारू अधिवक्ता थीं. वह हमेशा लोगों को न्याय दिलाने के लिए बढ़-चढ़कर प्रयास करती थीं. हालांकि कमलाक्षी का सपना शुरू से न्यायिक सेवा में जाने का था, लेकिन सीबीआई में चयन होना भी उनके न्याय के प्रति लगाव को ही दर्शाता है. उन्होंने बताया कि वह अभी भी न्यायिक सेवा की तैयारी जारी रखेंगी.
पिता बोले- इरादा मजबूत हो तो हर मुश्किल पार की जा सकती है
जब पिता राम सूजान पांडेय से बात की गई तो उनकी आवाज में खुशी और चेहरे पर गर्व साफ झलक रहा था. उन्होंने कहा कि बेटी ने खुद फोन कर यह खुशखबरी दी. आज वे एक सीबीआई अधिकारी के पिता हैं, जो उनके लिए बेहद गर्व की बात है. उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादा मजबूत हो और मेहनत सच्ची हो तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है. कमलाक्षी की यह सफलता संघर्ष कर अपने सपनों को पूरा करने वाले सभी युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है.
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