एस.यू. कॉलेज, हिलसा में स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों की पढ़ाई जल्द शुरू किए जाने की मांग को लेकर छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन बुधवार को सातवें दिन भी लगातार जारी रहा. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं ने महाविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर शांतिपूर्ण तरीके से ताला जड़ दिया और जमकर विरोध-प्रदर्शन किया.
इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. छात्रों का मुख्य उद्देश्य हिलसा अनुमंडल के साथ-साथ आसपास के तमाम ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर ही उच्च शिक्षा यानी पीजी की पढ़ाई का लाभ सुलभ कराना है.
प्रशासन की उदासीनता पर फूटा गुस्सा
आंदोलनकारी छात्रों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने के बावजूद विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई भी ठोस सकारात्मक पहल नहीं की गई है. प्रशासन की इसी उदासीनता और लचर रवैये के कारण छात्रों को अपना आंदोलन और अधिक तेज करने के लिए विवश होना पड़ा है.
छात्रों ने स्पष्ट घोषणा की है कि उनका आंदोलन आगे भी पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि जब तक उनकी न्यायोचित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक कॉलेज में तालाबंदी और प्रदर्शन का सिलसिला थमेगा नहीं.
क्षेत्र के विद्यार्थियों को उठानी पड़ रही है परेशानी
छात्र नेताओं ने अपनी बात रखते हुए बताया कि हिलसा और इसके आसपास के इलाकों के विद्यार्थियों को स्नातक के बाद स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई के लिए पटना या अन्य दूर-दराज के शहरों का रुख करना पड़ता है. इससे विद्यार्थियों को भारी आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
इसलिए एस.यू. कॉलेज में पीजी पाठ्यक्रमों की शुरुआत होना इस क्षेत्र के छात्रहित में अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने साफ किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के शैक्षणिक अधिकारों के विस्तार के लिए है.
प्रमुख रूप से उपस्थित छात्र-छात्राएं
इस सातवें दिन के प्रदर्शन और आंदोलन के दौरान छात्र नेता धर्मपाल राज, अमित पटेल, राकेश कुमार, आशीष राज, अंकेश रंजन, पंकज यादव, आइसा कुमारी, पूजा कुमारी, संध्या कुमारी, रौशन कुमार और आदित्य कुमार सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे और इस मांग का समर्थन किया.
