Bihar Swimming Training : राजगीर के राज्य खेल अकादमी में बिहार में तैराकी खेल के तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए दो दिवसीय आवासीय तकनीकी निर्णायक फाउंडेशन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का आयोजन किया गया.
भारतीय तैराकी महासंघ के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार तैराकी संघ से जुड़े 40 तकनीकी अधिकारियों ने भाग लिया. उन्हें आधुनिक प्रतियोगिता संचालन की बारीकियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवींद्रन शंकरण ने यह जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि राज्य में तैराकी प्रतियोगिताओं के संचालन को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने तथा तकनीकी अधिकारियों की दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से इस प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है.
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित तकनीकी अधिकारियों की उपलब्धता से भविष्य में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का संचालन अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण ढंग से किया जा सकेगा.
विशेषज्ञों ने दी आधुनिक नियमों और प्रबंधन की जानकारी
प्रशिक्षण का संचालन भारतीय तैराकी महासंघ द्वारा नामित विशेषज्ञ सुंदरेश एस. एवं मयंक कीर्तिभाई पटेल ने किया.
दोनों विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को तैराकी प्रतियोगिताओं के नवीनतम नियमों, निर्णायकों की भूमिका, समय निर्धारण, तकनीकी निर्णय प्रक्रिया, प्रतियोगिता प्रबंधन तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संचालन संबंधी विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी.
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से भी दक्ष बनाया गया, जिससे वे बड़े आयोजनों में प्रभावी भूमिका निभा सकें.
प्राधिकरण द्वारा की गई थी आवासन और भोजन की समुचित व्यवस्था
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने प्रशिक्षण में शामिल सभी प्रतिभागियों के लिए आवास, भोजन, परिवहन सहित आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की थी.
आवासीय स्वरूप में आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को सीखने और अपने अनुभव साझा करने का बेहतर अवसर प्रदान किया.
तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अहम कदम
महानिदेशक शंकरण ने विश्वास जताया कि इस प्रमाण-पत्र आधारित प्रशिक्षण से बिहार में तकनीकी अधिकारियों की कार्यकुशलता और निर्णय क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
इससे राज्य में एक सशक्त एवं प्रशिक्षित तकनीकी तंत्र विकसित होगा, जो भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की तैराकी प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन के साथ-साथ खिलाड़ियों के प्रदर्शन और खेल संस्कृति को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
यह पहल बिहार को तैराकी के क्षेत्र में तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.
