सावन की भक्ति और उमंग के बीच राजगीर के विभिन्न देवालयों में सोमवार से झुलनोत्सव का शुभारंभ पारंपरिक उल्लास और भक्तिभाव के साथ हुआ, जहां देवी स्थान मंदिर, जंगलिया बाबा धाम, गढ़ महादेव, पुरानी दशरथ किला सहित अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर भगवान को झूला झुलाने की परंपरा में भाग लिया और मंदिर परिसरों में भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा.
देवी स्थान मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन
देवी स्थान मंदिर परिसर में झुलनोत्सव के अवसर पर आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और गणेश वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसके बाद भक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद सभी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया.
श्रावण मास का धार्मिक महत्व और प्रकृति से जुड़ाव
हिंदू धर्म में श्रावण मास को अत्यंत पवित्र माना गया है जो भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना, व्रत, अभिषेक व विशेष पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है.
सावन में प्रकृति द्वारा हरियाली की चादर ओढ़ लेने के साथ वर्षा, ठंडी हवाओं और चारों ओर फैली हरियाली के बीच झूलों की परंपरा इसके उत्सवी स्वरूप को और भी आकर्षक बनाती है.
झूला झुलाने की परंपरा और आचार्य के विचार
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन में झूला झुलाने की परंपरा महज मनोरंजन नहीं बल्कि प्रकृति, भक्ति, प्रेम और पारिवारिक सौहार्द का प्रतीक है.
जहां कुंवारी कन्याएं और सुहागिन महिलाएं झूले का आनंद लेने के साथ मेहंदी और सोलह श्रृंगार की परंपरा भी निभाती हैं, और आचार्य डॉ. मिथिलेश पाण्डेय ने बताया कि यह उत्सव उमंग व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को जीवंत करता है.
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कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोग
देवी स्थान के इस पावन कार्यक्रम के दौरान रामकृष्ण प्रसाद सिंह, वार्ड पार्षद महेंद्र यादव, उपेंद्र कुमार विभूति, ज्ञानचंद जैन, कैलाश सिंह, उपेंद्र यादव, प्रो. अशोक कुमार, रामकुमार वर्मा और निरंजन साव सहित कई अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे.
