Nalanda News : नालंदा जिले के अराजकीय संस्कृत विद्यालयों की हालत लगातार बदतर होती जा रही है. वर्ष 2015 के बाद से नए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने के कारण कई स्कूलों में शिक्षक ही खत्म हो गए हैं. हालत ऐसी हो गई है कि कुछ विद्यालयों में पढ़ाई पूरी तरह बंद हो चुकी है और अब ये स्कूल बंदी की कगार पर पहुंच गए हैं.
रिटायर होते गए शिक्षक, खाली होते गए स्कूल
जिले में कुल 31 अराजकीय संस्कृत विद्यालय हैं, लेकिन विभागीय लापरवाही और आरक्षण रोस्टर जारी नहीं होने के कारण नए शिक्षकों की बहाली अटकी हुई है. पुराने शिक्षक और कर्मचारी एक-एक कर रिटायर होते गए, लेकिन उनकी जगह किसी की नियुक्ति नहीं हुई. कई विद्यालयों में एक भी शिक्षक नहीं बचा है.
कई स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह ठप
हीरा पांडेय संस्कृत मध्य विद्यालय जैतीपुर, प्राथमिक संस्कृत विद्यालय नूरसराय, चंद्रशेखर संस्कृत विद्यालय लोहड़ी और संस्कृत विद्यालय अमेरा जैसे कई स्कूलों में अब शिक्षक नहीं बचे हैं. ऐसे में छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की अनदेखी से संस्कृत शिक्षा खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है.
रोस्टर मांगा गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने बताया कि विभाग ने जुलाई 2025 में आरक्षण रोस्टर की मांग की थी. सभी स्कूलों ने रोस्टर तैयार कर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को सौंप भी दिया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस कारण नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है.
छात्रों का भविष्य अंधेरे में, अभिभावक परेशान
शिक्षकों की भारी कमी के कारण छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है. अभिभावकों का कहना है कि अगर जल्द बहाली नहीं हुई तो संस्कृत विद्यालयों का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा. अब लोग सरकार से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं.
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