बिहारशरीफ. नालंदा उद्यान महाविद्यालय, नूरसराय में समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर आयोजित 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रमाण-पत्र वितरण सह समापन समारोह सोमवार को हुआ. प्रशिक्षण में पटना, नालंदा, औरंगाबाद, गया, मुजफ्फरपुर और जहानाबाद के कुल 30 उर्वरक विक्रेताओं ने भाग लिया. इनमें पटना के 10, नालंदा के 10, औरंगाबाद के सात तथा गया, मुजफ्फरपुर और जहानाबाद के एक-एक प्रतिभागी शामिल थे.
किसानों तक सही और वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने पर जोर
समारोह को संबोधित करते हुए नालंदा उद्यान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रणधीर कुमार ने कहा कि उर्वरक विक्रेता किसानों तक कृषि संबंधी सही और वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने में महत्वपूर्ण कड़ी हैं. इसलिए उन्हें ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य करते हुए किसानों को समेकित पोषक तत्व प्रबंधन के प्रति जागरूक करना चाहिए.
उन्होंने किसानों को संतुलित एवं विवेकपूर्ण ढंग से उर्वरकों के प्रयोग तथा मृदा संरक्षण तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया. इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी.
मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक प्रयोग की सलाह
कार्यक्रम में डॉ. आजाद ने कहा कि किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए. मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की स्थिति जाने बिना अंधाधुंध उर्वरक का इस्तेमाल करने से खेती की लागत बढ़ने के साथ मृदा स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. उन्होंने जैविक और रासायनिक स्रोतों के संतुलित उपयोग पर बल दिया.
टिकाऊ खेती के लिए जैविक और रासायनिक स्रोतों का समन्वय
प्रशिक्षण पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अजीत कुमार ने कहा कि समेकित पोषक तत्व प्रबंधन के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक खाद, हरी खाद और जैव उर्वरकों का उचित समन्वय किया जा सकता है. इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ खेती को टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी.
30 प्रतिभागियों को प्रदान किया गया प्रमाण-पत्र
समारोह के अंत में प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सभी 30 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये. मौके पर महाविद्यालय के वैज्ञानिक, कर्मचारी तथा प्रशिक्षण से जुड़े अन्य सदस्य मौजूद थे.
