बाबा मणिराम की समाधि पर हर रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन तथा लंगोट अर्पण के लिए पहुंच रहे हैं. शहर में प्रसिद्ध बाबा मणिराम का लंगोट अर्पण मेले की शुरुआत विगत 29 जुलाई से हो गई है.
मेले के तीसरे दिन जिले के हजारों श्रद्धालुओं के द्वारा बाबा मणिराम की समाधि पर जाकर प्रसाद तथा लंगोट अर्पित किया गया. इस अवसर पर विभिन्न सरकारी तथा गैर सरकारी संगठनों के द्वारा भी बाबा मणिराम के अखाड़ा पर लंगोट अर्पित किया जा रहा है.
जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा निकाला गया जुलूस
जिला शिक्षा कार्यालय के द्वारा भी शुक्रवार को भारी हर्षोल्लास के साथ लंगोट अर्पण जुलूस निकाला गया, जिसमें घोड़े तथा गाजे-बाजे के साथ अधिकारी से लेकर लिपिक तथा परिचारी भी बढ़-चढ़कर शामिल हुए.
धार्मिक गीतों की धुन पर गाते-बजाते तथा बाबा मणिराम के जयकारे लगाते जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारी व कर्मी शाम में बाबा मणिराम की समाधि पर पहुंचे तथा वहां बाबा को लंगोट अर्पित कर आशीर्वाद और मन्नतें मांगीं.
डीईओ हेमचंद्र का संदेश और मेले की अवधि
इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचंद्र ने कहा कि बाबा मणिराम एक महान तपस्वी, साधक तथा संत के साथ-साथ मल्लयुद्ध के विशेषज्ञ थे.
इनके आशीर्वाद से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, इसलिए हर शहरवासी इस नौ दिवसीय मेले में अवश्य दर्शन-पूजन के लिए यहां पहुंचते हैं. लंगोट अर्पण को लेकर शहरवासियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है. बाबा मणिराम का लंगोट अर्पण मेला 6 अगस्त तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें जिले के हर सरकारी कार्यालय तथा विभिन्न संगठनों के द्वारा लंगोट अर्पित किया जाएगा.
