Bihar crime: अपनी मां की शिकायत करने थाने पहुंचा 8 साल का बच्चा,कहा- 'पुलिस अंकल मुझे मेरी मम्मी से बचाओ'

Bihar crime: बिहार के सीतामढ़ी जिले से एक आठ साल के बच्चे का वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में बालक ने अपनी मां पर कई गंभीर आरोप लगाए है. मामले को लेकर बालक थाने तक पहुंच गया.

Bihar News: कहा जाता है कि बच्चे मन के सच्चे होते हैं और वे सबसे अधिक प्यार और करीब अपनी मां से होते हैं. लेकिन ताजा मामला जो सामने आया है उसने सभी को सकते में डाल दिया है. दरअसल, बिहार के सीतामढ़ी जिले से एक आठ साल के बच्चे का वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में बालक ने अपनी मां पर कई गंभीर आरोप लगाए है. मामले को लेकर बालक थाने तक पहुंच गया. वायरल वीडियो में बालक कह रहा है कि पुलिस अंकल मेरी मां बहुंत पिटाई करती है. समय पर खाना भी नहीं देती है. वायरल वीडियो सीतामढ़ी शहर के चंद्रिका मार्केट गली का बताया जा रहा है.

थाने में पुलिस ने बच्चे को खिलाया खाना

थाने पहुंचने पर वहां बच्चे की बात सुनकर सभी पुलिस कर्मी हैरत में पड़ गए. इसके बाद थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने बच्चे की पूरी शिकायत सुनी. इसके बाद उसे चुप कराकर प्यार से खाना खिलाया और बच्चे के परिजनों को थाने बुलाया. पुलिस ने परिजनों को बच्चे को ना मारने की सख्त हिदायत दी. पुलिस ने परिजनों को हिदायत देते हुए समझाया कि बच्चे को समय से खाना खिलाया करें और उसके साथ मारपीट बिलकुल भी नहीं करें. इस वजह से बच्चे के मन पर गलत प्रभाव पड़ता है.

सोशल मीडिया पर वीडियो हो रहा वायरल

मां की शिकायत लेकर थाना पहुंचे 8 साल के बच्चे का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो वायरल होने के बाद यह इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है. बालक चौथी क्लास का छात्र बताया जा रहा है. बता दें कि वायरल वीडियो में बालक पुलिस से अपनी मां की शिकायत करते हुए कह रहा है कि जब वो अपनी मां से खाना मांगने गया तो उसकी मां ने उसकी जमकर पिटाई कर दी. यहां तक की उसकी मां समय से उसे खाना खाने को भी नहीं देती है. फिलाहल बालक के परिजनों को थाने बुलाकर पुलिस ने समझाइश दे दी है. परिजनों ने भी अपनी गलती स्वीकार करते हुए आगे से बच्चे का ध्यान रखने की बात कही है.

बच्चों के साथ न करें मारपीट, जानें कानून

बता दें कि बच्चों द्वारा पैरंट्स के खिलाफ केस दर्ज कराने के मामले भारत में काफी कम देखने को मिलते हैं, लेकिन यूरोपीय देशों में यह अक्सर होता है. भारत में जहां तक बच्चों के अधिकार का सवाल है तो बच्चे मारपीट या किसी भी तरह की प्रताड़ना से कानून में पूरी तरह प्रोटेक्टेड हैं. राइट-टू-एजुकेशन ऐक्ट के तहत टीचर भी बच्चे को डरा-धमका और पीट नहीं सकते. ऐसा करने पर केस दर्ज होगा और उनकी नौकरी तक जा सकती है.

क्या कहता है जेजे ऐक्ट

कानून के जानकारों कि मानें तो अगर बच्चे को पैरंट्स टार्चर करते हैं या पीटते हैं तो जेजे (जूवनाइल जस्टिस) ऐक्ट में पुलिस से शिकायत की जा सकती है. यदि बच्चे को चोट पहुंची है तो फिर आईपीसी के तहत केस दर्ज होगा. आईपीसी हो या जेजे ऐक्ट कानून में कही भी पैरंट्स अपवाद नहीं हैं. जेजे ऐक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर 6 महीने तक की सजा ही सकती है. यह मामला जमानती है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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