Bihar Bhumi: मुजफ्फरपुर शहर और इससे सटे बाहरी इलाकों में जमीन की कीमतों में जल्द ही भारी उछाल देखने को मिल सकता है. सरकार से मिले दिशा-निर्देश के बाद प्रशासन ने जमीन के न्यूनतम मूल्य दर (एमवीआर) में वृद्धि करने की आंतरिक तैयारी शुरू कर दी है. यह वृद्धि सबसे ज्यादा नगर निगम और उससे सटे इलाकों में देखने को मिलेगी.
सर्वे कर रिपोर्ट बनाने में जुटा विभाग
विभागीय दिशा-निर्देश के बाद रजिस्ट्री ऑफिस सर्वे कर रिपोर्ट बनाने में जुट गया है. जिला अवर निबंधक मनीष कुमार ने बताया कि वर्तमान में बाजार दर और एमवीआर में काफी अंतर है. इससे संबंधित पूरी रिपोर्ट बनायी जा रही है. इसके लिए रजिस्ट्री ऑफिस के पदाधिकारी व कर्मियों की अलग-अलग टीम बनायी गयी है. बताया कि वे खुद भी शहर से सटे सबसे घनी आबादी वाले इलाके में पहुंच बाजार दर व एमवीआर के अंतर को टटोल रिपोर्ट बना रहे हैं.
आने वाले समय में कई गुना महंगा होगी रजिस्ट्री
वर्तमान में, नगर निगम की सीमा से 08 से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली जमीन की रजिस्ट्री पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है. लेकिन, आने वाले समय में यह शुल्क कई गुना ज्यादा हो सकता है. यही नहीं, विभागीय स्तर पर जमीन के रेट में वृद्धि के साथ-साथ एमवीआर बढ़ाने को लेकर एक नियमावली भी तैयार की जा रही है. इसके लिए नगर निगम सहित सभी नगर निकायों से वर्गीकृत सड़कों की सूची भी मांगी जा रही है.
न्यूनतम 50 लाख और अधिकतम 04 करोड़ रुपये कट्ठा तक होगा जमीन का रेट
विभागीय स्तर पर एमवीआर में वृद्धि को लेकर जिस तरह के दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं, यदि उन्हें लागू किया जाता है तो शहरी क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री महंगी हो जायेगी. नये नियमों के तहत बूढ़ी गंडक नदी बांध के अंदर की जमीन को छोड़कर, शहर के किसी भी वार्ड की आवासीय जमीन का सरकारी रेट न्यूनतम 50 लाख रुपये प्रति कट्ठा तक हो जायेगा, जिसका वर्तमान रेट अभी 16 से 30 लाख रुपये है. वहीं, व्यावसायिक (कमर्शियल) जमीन की रजिस्ट्री दर न्यूनतम 01 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा तक पहुंच जायेगी. वार्ड नंबर 20, 23, 24 आदि में पड़ने वाले मोतीझील, कल्याणी, सरैयागंज टावर और इससे सटे प्रमुख इलाकों में, जहां कमर्शियल जमीन का सरकारी रेट अभी 01 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा है, एमवीआर में नई वृद्धि के बाद उसके 04 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा तक पहुंचने का अनुमान है. इसके अलावा शहर के कई पॉश इलाके ऐसे भी हैं, जहां आवासीय जमीन की रजिस्ट्री भी 01 से 02 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा के सरकारी रेट पर होने की संभावना जताई जा रही है.
बन रही है एमवीआर पुनरीक्षण की नयी नियमावली
निबंधन विभाग एमवीआर पुनरीक्षण की नयी नियमावली तैयार कर रहा है, जिसमें अब हर साल एक तय प्रतिशत की राशि एमवीआर में अपने आप वृद्धि हो जायेगी. बताया जाता है कि दिसंबर में नयी नियमावली की कैबिनेट के साथ सक्षम प्राधिकार से मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू कर दिया जायेगा.
एमवीआर में वृद्धि के कारण
– नये नगर पंचायतों का गठन और नगर निगम क्षेत्र के विस्तार का प्रस्ताव
– शहर के बाहरी इलाकों में तेजी से हो रहा विकास
– एमवीआर से कई गुना ज्यादा है बाजार दर
– शहर की जमीन एमवीआर से 10 से 15 गुना अधिक रेट पर हो रही है बिक्री
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सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला क्षेत्र
– नगर निगम की सीमा से 08-10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्र.
– नगर परिषद और नगर पंचायत की सीमा से 04 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्र.
– मुशहरी अंचल के अंतर्गत आने वाले सभी राजस्व गांव पेरिफेरल एरिया में आते हैं.
– एनएच के साथ प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एरिया व इसके आसपास का इलाका.
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