भागलपुर की धरती रत्नगर्भा है. अंग क्षेत्र पूर्व का बौद्धिक द्वार है. यह आज की बात नहीं है, बल्कि बहुत पहले से यहां स्वादिष्ट आम, लीची, कतरनी धान के साथ-साथ तसर सिल्क का उत्पादन होता है. उक्त बातें अंतरराष्ट्रीय ख्याति के किसान सह साहित्यकार डॉ राजाराम त्रिपाठी ने बुधवार को कही. मौका था एक स्थानीय होटल में युग चेतना फाऊंडेशन, अंग-जन-गण, अंग-मदद फाउंडेशन और अंगिका सभा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मातृभाषा दिवस पर आयोजित मातृभाषा के महत्व विषयक गोष्ठी का. उन्होंने इस क्षेत्र के लोगों से अंगिका को मान-सम्मान दिलाने के लिए सतत संघर्षरत रहने की अपील की. इस संदर्भ में उन्होंने भरपूर सहयोग करने की भी बात कही. उन्होंने आधुनिक खेती में उपयोग किये जा रहे रासायनिक दवाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि मिट्टी में जो दवाइयां छिड़की जा रही हैं, वह पानी और हवा को जहरीली बना रही है. इसका दुष्प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. उन्होंने पूर्वजों द्वारा खेती के तरीकों की याद दिलाते हुए कहा कि अब हमें वहीं लौटने की जरूरत है. पहले पेड़ लगाओ फिर खेती करो यह तरीका आज काफी कारगर साबित हो रहा है. हमारे पूर्वज यही करते थे. मातृभाषा नहीं अपनाना आधुनिकता नहीं लोग स्वयं को मॉडर्न तो समझ रहे हैं, लेकिन अपनी मातृभाषा की कद्र नहीं करते. कृषि वैज्ञानिकों से उन्होंने अपील की कि किसानों के महत्व की बातें उनकी ही मातृभाषा में उन तक पहुंचाएं तो काफी लाभकारी होगा. उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी क्या खायेगी इस पर गंभीर चिंतन करने की जरूरत है. साहित्यकारों से भी उन्होंने अपील की कि किसानों को केंद्र में रखकर भी रचना करें और किसानों की पीड़ा को उभारें. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोग धन्य हैं कि उत्तर वाहिनी गंगा यहां प्रवाहित होती है. उन्होंने जड़ी-बूटी की खेती को भी काफी बढ़ावा देने की आवश्यकता बतायी. अपने अध्यक्षीय भाषण में युग फाउंडेशन के संरक्षक डॉ. शंभू दयाल खेतान ने कहा कि डॉ राजाराम त्रिपाठी जैसे महान कृषि विशेषज्ञ और साहित्यकार का यहां आगमन सौभाग्य की बात है. उन्होंने इस क्षेत्र के साहित्यकारों का भी डॉक्टर त्रिपाठी से परिचय कराया. मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ मनोज, डॉ मीरा झा और अंग-जन-गण के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुधीर मंडल उपस्थित थे. अंग-जन-गण के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुधीर मंडल ने आगत अतिथियों का स्वागत किया. कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी प्रसून लतांत ने किया. कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति डॉ मनोज ने भी अपने विचार व्यक्त किये. इस मौके पर वरिष्ठ कवि राजकुमार ने लोरी सुनायी. मंजूषा कलाकार मनोज पंडित ने डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी को अंग वस्त्र और पेंटिंग भेंट की. इस अवसर पर अंग भाषा फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ अमरेंद्र, नाटककार सत्यनारायण मंडल, शीतांशु अरुण, डॉ मनोज मीता, कमल जायसवाल, प्रीतम विश्वकर्मा, गौतम सुमन गर्जना, अनुकृति, अजीत कुमार आदि उपस्थित थे.
bhagalpur news. भागलपुर की धरती रत्नगर्भा, यहां कतरनी, जर्दालू, लीची उपजती है : डॉ राजाराम त्रिपाठी
भागलपुर की धरती रत्नगर्भा है. अंग क्षेत्र पूर्व का बौद्धिक द्वार है. यह आज की बात नहीं है, बल्कि बहुत पहले से यहां स्वादिष्ट आम, लीची, कतरनी धान के साथ-साथ तसर सिल्क का उत्पादन होता है.
