स्कूल जाने के लिए सुबह तीन बजे उठकर ही नाव से पहुंच रहे
भागलपुर मनोज कुमार की रिपोर्ट,
भागलपुर और नवगछिया के बीच जीवनरेखा माना जाने वाला विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद आम लोगों के साथ-साथ शिक्षकों की भी परेशानी बढ़ गयी है. भागलपुर से नवगछिया और नवगछिया से भागलपुर आने-जाने वाले शिक्षक रोजाना घंटों की मशक्कत के बाद किसी तरह अपने विद्यालय पहुंच पा रहे हैं. शिक्षकों का कहना है कि पुल बंद होने के कारण अब उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है और मानसिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है.शिक्षकों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उन्हें सुबह 3 बजे ही उठना पड़ता है। घाटों पर नाव पकड़ने के लिए भारी भीड़ और अफरा-तफरी का माहौल रहता है. हर किसी को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने की चिंता सताती रहती है. नाव पर चढ़ने के दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बन जाती है, जिससे हादसे का डर भी बना रहता है. कई बार नाव छूट जाने के कारण शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंच पाते और उनकी उपस्थिति प्रभावित हो जाती है. शिक्षकों ने बताया कि पहले जहां कुछ ही समय में विद्यालय पहुंच जाते थे, वहीं अब ढाई से तीन घंटे जाने में और उतना ही समय लौटने में लग रहा है. लगातार लंबी यात्रा और असुविधा के कारण शारीरिक और मानसिक थकान बढ़ती जा रही है। इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वे बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं, लेकिन रास्ते की परेशानियां उनके कार्य में बड़ी बाधा बन चुकी हैं,शिक्षक समुदाय ने जिला प्रशासन और सरकार से जल्द से जल्द बेली ब्रिज निर्माण कार्य पूरा कराने और विक्रमशिला सेतु की मरम्मत में तेजी लाने की मांग की है. उनका कहना है कि जब तक पुल चालू नहीं होगा, तब तक हजारों लोगों की परेशानी खत्म नहीं होगी.
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