भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट
Bhagalpur News : भागलपुर रेलवे स्टेशन के पास गुमटी नंबर एक से तीन तक विकसित की जा रही संटिंग लाइन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है. रेलवे ने दो और तीन नंबर के बीच शेष रेल पटरी को जोड़ दिया है. इसके साथ ही यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए अस्थायी सड़क का निर्माण भी किया गया है, जिससे आवागमन प्रभावित न हो.ट्रैक जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य पूरा
रेलवे अधिकारियों की निगरानी में दो और तीन नंबर ट्रैक को सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया है. यह कार्य संटिंग लाइन परियोजना का अहम हिस्सा माना जा रहा है. पटरी जुड़ने के बाद आगे के निर्माण कार्यों को गति मिलेगी.रेलवे की तकनीकी टीम लगातार स्थल पर निगरानी कर रही है. इस परियोजना से स्टेशन क्षेत्र की परिचालन क्षमता बढ़ेगी. भविष्य में ट्रेनों के संचालन में भी सुविधा होगी.
लोगों की सुविधा के लिए बनायी गयी अस्थायी सड़क
निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसका भी ध्यान रखा गया है. रेलवे ने स्टोन डस्ट डालकर अस्थायी सड़क तैयार कर दी है. इससे आसपास के लोगों को आने-जाने में परेशानी नहीं होगी. निर्माण अवधि के दौरान यह सड़क उपयोग में रहेगी. स्थानीय लोगों ने इस व्यवस्था पर संतोष जताया है.रेलवे ने सुरक्षा मानकों का भी विशेष ध्यान रखा है.अब ओवरब्रिज निर्माण की तैयारी
रेल लाइन जोड़ने के बाद अब इस स्थान पर ओवरब्रिज निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा. इसके लिए आवश्यक निर्माण सामग्री पहले से तैयार की जा चुकी है. बड़े आकार के सीमेंट क्यूब स्थल पर उपलब्ध करा दिए गए हैं. निर्माण एजेंसी ने प्रारंभिक तैयारियां पूरी कर ली हैं. ओवरब्रिज बनने से यातायात व्यवस्था और बेहतर होगी. साथ ही रेल परिचालन में भी बाधाएं कम होंगी.दो और तीन नंबर तक पहुंचेगा इलेक्ट्रिफिकेशन
संटिंग लाइन के एक नंबर से दो नंबर के कुछ हिस्से तक इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य पूरा हो चुका है. अब शेष दो नंबर और पूरे तीन नंबर ट्रैक तक विद्युतीकरण किया जाएगा. रेलवे इसके लिए तकनीकी तैयारियों में जुट गया है. इलेक्ट्रिफिकेशन के बाद परिचालन प्रक्रिया अधिक सुगम होगी. इससे समय और संसाधनों की भी बचत होगी. रेलवे की आधुनिक व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी.600 मीटर लंबी संटिंग लाइन बनेगी बड़ी सुविधा
गुमटी नंबर एक से तीन तक लगभग 600 मीटर लंबी संटिंग लाइन बिछाई जा चुकी है. यह लाइन रेलवे के लिए अतिरिक्त परिचालन क्षमता उपलब्ध कराएगी. ट्रेनों के रैक को व्यवस्थित ढंग से खड़ा करने में मदद मिलेगी. यार्ड प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक आसान होगा. रेलवे परिचालन में लचीलापन बढ़ेगा.स्टेशन पर ट्रेनों के दबाव को भी कम किया जा सकेगा.
