अंग जनपद का साहित्य शुरू से ही समृद्ध रहा है. इसकी समृद्धि और अस्मिता को निरंतर बनाये रखना साहित्यकारों का महत्वपूर्ण दायित्व है. कठोर साधना के बल अपनी रचना को इस हद तक सशक्त और प्रभावी बनानी होगी, ताकि वह एक आदर्श और मिसाल बनकर समाज को बेहतर राह दिखा सके. साहित्य की समृद्धि तभी संभव है जब युवाओं को समाज और संस्कृति से जोड़ा जाये. उक्त बातें बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कांत मिश्रा ने कही. मौका था गोशाला परिसर में आयोजित साहित्यिक संस्था बगुला मंच के वार्षिक सम्मेलन का. विशिष्ट अतिथि बिहार अंगिका अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ लखन लाल सिंह आरोही ने मंच संस्थापक व्यंग्यकार रामावतार राही के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की चर्चा करते हुए कहा रामावतार राही एक कुशल व्यंग्यकार थे. समारोह की अध्यक्षता साहित्यकार डॉ प्रेमचंद पांडेय ने की. जीनी हमीदी, राम रतन चूड़ीवाला, साहित्यिक पत्रिका सुसंभाव्य के संपादक दयानंद जायसवाल, राजकुमार और प्रसून ठाकुर भी मंचासीन थे. सुलतानगंज के कवि सुधीर कुमार प्रोग्रामर को उनके उल्लेखनीय साहित्यिक योगदान के लिए पं जनार्दन प्रसाद झा द्विज स्मृति साहित्य सम्मान से सम्माननित किया गया. कार्यक्रम का आगाज लोकगायक संजीव कुमार झा ने सरस्वती वंदना से किया. गीतकार राजकुमार ने इरान और इजरायल में हुए विध्वंसात्मक उपद्रव से उत्पन्न परिस्थितियों को अपने अंगिका चैता गीत में पिरोया. युवा उद्घोषक कुमार गौरव ने दिवंगत व्यंग्यकार स्व रामावतार राही की आवाज में उनके अंगिका गीत का टेप बजाकर सबकी आंखें नम कर दी. वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार ने अपनी रचना प्रस्तुत की. कार्यक्रम का संचालन सचिव धीरज पंडित ने किया. धन्यवाद ज्ञापन संयोजक महेश मणि ने किया. त्रिलोकीनाथ दिवाकर, कपिल देव कृपाला, इकराम हुसैन शाद, शेखर खागड़ी, कृष्ण कुमार क्रांति, अभय कुमार भारती, साकेत कुमार ध्रुव, अनवर भागलपुरी, निशांत कुमार निश्छल, गणेश ठाकुर अकेला, कृष्ण मोहन सिन्हा किसलय, डॉ जयंत सिन्हा जलद, मृणाल मुकेश भरद्वाज, सुनील कुमार पटेल, महेश मणि, अजीत कुमार शांत, सोहन मंडल, प्रीतम कुमार, शशि शंकर, विनोद राय मनोज कुमार माही, डॉ केके मंडल, कमर तवां, मो काबुल और सच्चिदानंद किरण उपस्थित थे.
bhgalpur news. साहित्य की समृद्धि युवाओं को समाज व संस्कृति से जोड़ कर ही संभव
अंग जनपद का साहित्य शुरू से ही समृद्ध रहा है. इसकी समृद्धि और अस्मिता को निरंतर बनाये रखना साहित्यकारों का महत्वपूर्ण दायित्व है.
