डीबीए चुनाव से पूर्व घमासान : अनशन पर बैठे अधिवक्ताओं के समर्थक व निर्वाची पदाधिकारी के समर्थकों के बीच विवाद

Updated at : 18 May 2024 2:54 PM (IST)
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डीबीए चुनाव से पूर्व घमासान : अनशन पर बैठे अधिवक्ताओं के समर्थक व निर्वाची पदाधिकारी के समर्थकों के बीच विवाद

डीबीए चुनाव से पूर्व घमासान : अनशन पर बैठे अधिवक्ताओं के समर्थक व निर्वाची पदाधिकारी के समर्थकों के बीच विवाद

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जिला विधिज्ञ संघ (डीबीए) चुनाव को लेकर मॉडल रूल का उल्लंघन कर हो रही प्रक्रियाओं का आरोप लगाते हुए विरोध जारी है. इसको लेकर पिछले एक सप्ताह से चल रहा धरना-प्रदर्शन गुरुवार को आमरण अनशन सह सत्याग्रह में बदल गया. इधर शुक्रवार को आमरण अनशन पर बैठे अधिवक्ताओं के समर्थकों और निर्वाची पदाधिकारी के समर्थकों के बीच जमकर विवाद हो गया. देखते ही देखते वहां अधिवक्ताओं की भीड़ इकट्ठा हो गयी. अधिवक्ता दो गुटों में बंट कर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगे. डीबीए परिसर में चल रहे हंगामे की सूचना पाकर जोगसर थानाध्यक्ष भी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे. पर अधिवक्ताओं ने उनकी एक न सुनी. थानाध्यक्ष ने इस बात की जानकारी वरीय पुलिस पदाधिकारियों को दी. विरोध करने वाले अधिवक्ताओं ने उनकी मांगे पूरी नहीं होने पर हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही. अनशन पर बैठे अधिवक्तओं की तबीयत बिगड़ने की आशंका पर मेडिकल टीम ने शुक्रवार को भी मौके पर पहुंच कर उनकी स्वास्थ्य जांच की. स्थिति सामान्य होने के बाद वे लोग लौट गये. अनशन पर बैठे अधिवक्ताओं और उनके समर्थकों का आरोप था कि दागी निर्वाची पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गयी है. इसके अलावा पूर्व में मतगणना में स्वास्तिक के मोहर को हटा टिक मार्क का प्रयोग किया जायेगा, जिसे कोई भी टेंपर कर मतगणना को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में निष्पक्ष चुनाव करा पाना मुमकिन नहीं है. डीबीए चुनाव के विरोध में बैठे अधिवक्ताओं का कहना था कि बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर बनाये गये मॉडल रूल का घोर उल्लंघन किया जा रहा है. साथ ही चुनाव बजट को भी लेकर धांधली की गयी है. मॉडल रूल के विरुद्ध निर्वाची पदाधिकारी द्वारा कुछ अधिवक्ताओं का नामांकन रद्द कर दिया गया. चुनाव से नामांकन से लेकर मतदान तक की प्रकियाओं की जानकारी अखबारों के माध्यम से छपवाने का नियम है, जिसे दरकिनार किया गया. इधर निर्वाची पदाधिकारी और उनके समर्थकों का कहना था कि डीबीए चुनाव को लेकर किये जा रहे सभी कार्य नियम अनुकूल हैं. हर एक बिंदु का खास ख्याल रखा जा रहा है. इसके बावजूद चुनाव को जानबूझ कर कर बाधित करने के लिए कुछ अधिवक्ता अनशन और धरना-प्रदर्शन कर चुनाव प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं. डीबीए चुनाव को रद्द करने और निर्वाची पदाधिकारी द्वारा की जा रही मनमानी का विरोध करते हुए अधिवक्ता अजीत कुमार सोनू और अधिवक्ता कपिल देव कुमार अनशन कर रहे हैं. उनके साथ उनके समर्थक आशीष कुमार, अभिषेक कुमार, दिनेश कुमार, सुधीर कुशवाहा, कैलाश यादव, मुकेश यादव आदि लोग शामिल हैं. इन बिंदुओं पर अनशनकारियों ने उठाया सवाल : – किस मॉडल रूल से उनका नाम काटा गया? – किस मॉडल रूल से पुन: नाम को जोड़ा गया? – किस मॉडल रूल के तहत उनका नाम मतदाता सूची में दिया गया? – किस मॉडल रूल से उनके द्वारा दाखिल नामांकन रद्द किया गया? – किस मॉडल रूल के तहत 1 करोड़ से अधिक रुपये की निकासी बैंक से की गयी? – किस मॉडल रूल के तहत स्वास्तिक चिन्ह वाले मोहर को बदल गया? – किस मॉडल रूल के अनुसार नामांकन पत्र लिया गया?

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