Bhagalpur Sultanganj Shiv Corridor: भागलपुर का सुल्तानगंज अब जल्द ही उज्जैन के महाकाल लोक और वाराणसी के काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर की तरह भव्य रूप में नजर आएगा. लंबे समय से भूमि विवाद में उलझी यह महत्वाकांक्षी योजना अब प्रशासन और रेलवे के बीच हुए भूमि आदान-प्रदान के निर्णय के बाद गति पकड़ने जा रही है. गंगा तट पर प्रस्तावित शिव कॉरिडोर, धर्मशाला और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए जिस जमीन की जरूरत थी, वह रेलवे के अधीन थी. इस कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही थी.
क्या प्रस्ताव तैयार किया गया
अब जिला प्रशासन ने इस समस्या का समाधान निकालते हुए रेलवे को तीन अलग-अलग स्थानों पर ऑप्शनल जमीन देने का फैसला किया है. इसके तहत रेलवे की लगभग 17 एकड़ 47.625 डिसमिल भूमि के बदले जगदीशपुर हॉल्ट के पास 18.98 एकड़, बरारी क्षेत्र में 0.6 डिसमिल और सुल्तानगंज में एनएच स्थित आईबी के पास 0.7 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इससे रेलवे की जमीन खाली कराकर कॉरिडोर निर्माण का मार्ग आसान हो जाएगा.
प्रशासन की ओर से फ्री भूमि ट्रांसफर का प्रस्ताव राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेज दिया गया है. विभागीय स्वीकृति मिलते ही औपचारिक लैंड एक्सचेंज की प्रक्रिया शुरू होगी और इसके बाद निर्माण कार्य को हरी झंडी मिल जाएगी. इस कदम के बाद सुल्तानगंज में भी उज्जैन और वाराणसी की तर्ज पर शिव कॉरिडोर का सपना साकार हो सकेगा.
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इस प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम चल रहा
शिव कॉरिडोर के साथ-साथ गंगा नदी की पुरानी धारा को पुरानी सीढ़ी घाट की ओर मोड़ने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है. जल संसाधन विभाग इस परियोजना को पूरा कर रहा है. इसके पूरा होने पर श्रावणी मेले के दौरान कांवरियों को उत्तरवाहिनी गंगा में सुरक्षित स्नान की सुविधा सीधे घाट के पास मिलेगी.
शिव कॉरिडोर सुल्तानगंज के धार्मिक और पर्यटन स्वरूप को पूरी तरह बदल देगा. इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं, सुरक्षा और सुव्यवस्था मिलेगी. स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा. परियोजना पूरी होने के बाद सुल्तानगंज एक बड़े आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान बनेगा.
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