Bettiah News: जनवादी लेखक संघ के बैनर तले रविवार को रिक्शा मजदूर सभा भवन में मुंशी प्रेमचंद का स्मृति दिवस मनाया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना ने की, जबकि संचालन जलेस के जिला मंत्री अनिल अनल ने किया. कार्यक्रम में साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों और जनसमस्याओं को सामने रखा.
मुंशी प्रेमचंद की स्मृति को किया गया याद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष डॉ. जाकिर हुसैन जाकिर ने मौजूदा दौर और सामाजिक परिस्थितियों पर प्रकाश डाला. डॉ. जफर इमाम जफर और अरुण गोपाल ने कहा कि सरलता ही सबलता को ढालती है. वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य और उनकी सामाजिक चेतना को याद करते हुए साहित्य की जनपक्षधर भूमिका पर चर्चा की.
कवियों ने अपनी रचनाओं से बांधा समां
कार्यक्रम के दौरान निखिल चंद्र पांडेय, श्याम जी ठाकुर, नवल जी और डॉ. ज्ञानेश गुंजन ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी. इस दौरान 'साहब खालन इंडिया गेट' रचना ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया.
कवि नंदलाल ठाकुर, राजीव जी और प्रगतिशील लेखक संघ के संयोजक अतुल अंजान की 'बदरा हो और बरस मेरा गांव' रचना को भी उपस्थित लोगों ने खूब सराहा. कवि जय किशोर जय ने अपनी रचना के माध्यम से लोगों को भाव-विभोर कर दिया.
किसानों और मजदूरों की आवाज उठाने की अपील
बिहार राज्य किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष प्रभुराज नारायण राव ने कहा कि किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं पर जिस प्रकार हमले बढ़ रहे हैं, उन्हें रोकने के लिए लेखकों को अपनी कलम और कविताओं के माध्यम से आम जनता को जागरूक करना होगा. उन्होंने साहित्यकारों से जनसमस्याओं को अपनी रचनाओं में प्रमुखता से उठाने की अपील की.
साहित्यकारों और सामाजिक संगठनों की रही भागीदारी
कार्यक्रम में किसान सभा के जिला मंत्री प्रकाश कुमार वर्मा, सीटू के जिला महासचिव शंकर कुमार राव और सीटू से संबद्ध तांगा चालक संघ के महासचिव नीरज बरनवाल ने भी अपने विचार रखे. वक्ताओं ने साहित्य, सामाजिक सरोकार और जनआंदोलन के बीच संबंध पर चर्चा करते हुए समाज के कमजोर वर्गों की आवाज को मजबूती से उठाने की जरूरत बताई.
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