बेतिया . स्थानीय निबंधन विभाग में पदस्थापित लिपिक अशोक कुमार चौधरी के विरुद्ध दंड अधिरोपित किया गया है. विभागीय कार्रवाई के दौरान उनके दो वेतन वृद्धि पर रोक लगायी गयी है. यह कार्रवाई उनके द्वारा विभागीय निदेश के बावजूद रोक सूची को रक्षी संचिका में संधारित नहीं करने, 47 ए से संबंधित पंजी में वांछित अद्यतन सूचना अंकित नही करने तथा पंजी का संधारण नियमानुसार नहीं करने के आरोप में हुआ है. आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार छपरा (सारण) निबंधन कार्यालय में पदस्थापन के दौरान उक्त आरोप सामने आये थे. इस संबंध में उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई संधारित की गयी. इस दौरान उनसे स्पष्टीकरण की मांग भी की गयी थी. लेकिन बावजूद इसके उनके द्वारा विभागीय निदेश की अवहेलना करते हुए ससमय कारण पृच्छा दायर नही किया गया. पुनः विभागीय पत्र 12. दिसंबर 2024 के द्वारा अंतिम रूप से चेतावनी के साथ स्मारित करने के उपरांत उन्हें अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया. जिसमें उन्होंने अंकित किया है कि निबंधन कार्यालय, छपरा ने रोक सूची की रक्षी संचिका एवं 47 ए से संबंधित पंजी का अपूर्ण प्रभार प्राप्त हुआ था. निरीक्षण के उपरांत उनके द्वारा यथासंभव रोक सूची को रक्षी संचिका में संधारण किया गया है एवं 47ए से संबंधित पंजी में अद्यतन सूचना भी अंकित कर दिया गया है तथा उनके द्वारा पंजी का संधारण नियमानुसार कर दिया गया है. समर्पित स्पष्टीकरण के आलोक में संयुक्त सचिव द्वारा समर्पित निरीक्षण प्रतिवेदन स्पष्टीकरण की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक समीक्षा की गई. समीक्षोपरांत श्री चौधरी द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन समर्पित किये जाने के उपरांत ही 47 ए से संबंधित पंजी एवं रोक सूची संबंधी रक्षी संचिका एवं पंजी में उद्यतन सूचना अंकित करते हुए पंजी का संधारण किया गया. जबकि पूर्व में ही उपरोक्त पंजी एवं संचिकाओं को नियमानुसार उद्यतन सूचना अंकित करते हुए पंजी को संधारित करने के लिए विभागीय निदेश परिचालित किया गया था. अंततः चौधरी के द्वारा विभागीय निदेश का उल्लंघन किया गया जो उनके कर्त्तव्य पालन में लापरवाही का परिचायक है. निरीक्षण प्रतिवेदन में भी संयुक्त सचिव ने श्री चौधरी को सरकारी कार्यों के निष्पादन एवं कर्त्तव्य पालन में लापरवाही बरते जाने का उल्लेख किया गया है. विभाग द्वारा लगभग 10 (दस) पत्र व स्मार पत्र के द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किये जाने का निदेश दिये जाने के बाबजूद भी उनके द्वारा विभागीय निदेश की अवहेलना करते हुए समय से कारण पृच्छा दायर नहीं किया गया जो उनकी लापरवाही, कर्त्तव्यहीनता एवं स्वेच्छाचारित का परिचायक बताया है. विभागीय कार्रवाई के दौरान अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार अशोक कुमार चौधरी, द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण को अस्वीकृत करते हुए उनकी कर्त्तव्यपालन में लापरवाही, कर्त्तव्यहीनता एवं स्वेच्छाचारिता बरतने के कारण निन्दन एवं दो वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया है.
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