राजकुमार शुक्ल की 150वीं जयंती मनायी गयी, चंपारण सत्याग्रह के सूत्रधार के योगदान को किया याद

चंपारण सत्याग्रह के सूत्रधार पंडित राजकुमार शुक्ल की 150वीं जयंती मनाई गई. इस अवसर पर उनके असाधारण योगदान और किसानों की पीड़ा को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के उनके संघर्ष को याद किया गया.

Raj Kumar Shukla Jayanti: बेतिया. महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय के स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से चंपारण सत्याग्रह के सूत्रधार और प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी पंडित राजकुमार शुक्ल की 150वीं जयंती समारोहपूर्वक मनायी गयी. कार्यक्रम में वक्ताओं ने चंपारण के किसानों की आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने और महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह में राजकुमार शुक्ल की महत्वपूर्ण भूमिका को याद किया.

किसानों की पीड़ा को जीने वाले दृढ़संकल्पित किसान थे शुक्ल

समारोह के अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) नवल किशोर बैठा ने कहा कि राजकुमार शुक्ल कोई पदाधिकारी या नेता नहीं, बल्कि किसानों की पीड़ा को जीने वाले दृढ़संकल्पित किसान थे.

उन्होंने कहा कि नीलहे अंग्रेजों की शोषणकारी तिनकठिया प्रथा से त्रस्त चंपारण के किसानों की आवाज को राजकुमार शुक्ल ने सफलतापूर्वक राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया. महात्मा गांधी के विश्व प्रसिद्ध चंपारण सत्याग्रह के सूत्रधार बनकर उन्होंने इतिहास रचने का काम किया.

चंपारण सत्याग्रह ने बढ़ायी राजनीतिक सहभागिता

राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक अध्यापक डॉ. गौतम कुमार ने कहा कि राजनीति विज्ञान की दृष्टि से चंपारण सत्याग्रह का एक महत्वपूर्ण पक्ष राजनीतिक सहभागिता का विस्तार था.

उन्होंने कहा कि चंपारण सत्याग्रह जैसी घटनाओं ने किसान, ग्रामीण समाज और सामान्य नागरिक को राजनीतिक प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाया.

चंपारण बना जनप्रतिरोध और नागरिक चेतना की प्रयोगभूमि

महाविद्यालय के बर्सर सह विद्वान प्राध्यापक डॉ. योगेंद्र सम्यक ने कहा कि बिहार के राजनीतिक इतिहास में राजकुमार शुक्ल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से चंपारण केवल बिहार का एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि औपनिवेशिक अन्याय के खिलाफ जनप्रतिरोध, नागरिक चेतना और अहिंसक राजनीतिक संघर्ष की प्रयोगभूमि बन गया.

प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने रखे विचार

कार्यक्रम में महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने भी पंडित राजकुमार शुक्ल के जीवन, चंपारण सत्याग्रह और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान पर अपने विचार व्यक्त किये.

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लेखक के बारे में

By रवि 'रंक'

90 के दशक में विद्यार्थी जीवन से ही रवि 'रंक' के आलेख, निबंध, संस्मरण और कविताएं क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लिखते रहे हैं. हिंदी विषय में स्नातकोत्तर योग्यताधारी रवि 'रंक' ने दैनिक हिंदुस्तान के पटना से प्रकाशित उत्तर बिहार संस्करण के साथ जनवरी 2001 से अपनी पत्रकारिता शुरु की. फरवरी 2020 में हिंदुस्तान से अलग होकर प्रभात खबर के पश्चिम चंपारण संस्करण में बतौर जिला मुख्यालय संवाददाता के रूप में पदस्थापित हैं.

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