Bettiah News: राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के अवसर पर महाराजा हरेन्द्र किशोर जिला केंद्रीय पुस्तकालय, बेतिया में महान पुस्तकालय वैज्ञानिक डॉ. एसआर रंगनाथन की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई. कार्यक्रम की शुरुआत उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई. इस दौरान पुस्तकालय एवं ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया गया.
डॉ. एसआर रंगनाथन के योगदान को किया याद
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. एसआर रंगनाथन ने भारत में पुस्तकालय विज्ञान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने पुस्तकालयों को आम लोगों तक ज्ञान पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया.
वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल युग में भी रंगनाथन के विचार और पुस्तकालय संबंधी सिद्धांत बेहद प्रासंगिक हैं.
पुस्तकालय सेवाओं को बेहतर बनाने पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान पुस्तकालय के विकास, पाठकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और पुस्तकालय सेवाओं को अधिक प्रभावी एवं जनोपयोगी बनाने को लेकर विचार-विमर्श किया गया.
वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों, शोधार्थियों और समाज के सभी वर्गों के लिए ज्ञान एवं शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है.
प्रभारी पुस्तकालयाध्यक्ष ज्योति प्रकाश सम्मानित
महाराजा हरेन्द्र किशोर जिला केंद्रीय पुस्तकालय के प्रभारी पुस्तकालयाध्यक्ष ज्योति प्रकाश को पुस्तकालय के विकास एवं उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया. उपस्थित लोगों ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी समर्पित भावना से पुस्तकालय के विकास में योगदान देने की शुभकामनाएं दीं.
विद्यार्थियों में अध्ययन और वैज्ञानिक सोच बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम में मुनीन्द्र कुमार झा, जिला समन्वयक, राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस, पश्चिम चंपारण, राजीव कुमार पाठक, प्रधानाध्यापक, राज कुमार पाण्डेय, बृजेश कुमार, चन्द्र भूषण पाण्डेय एवं मनजीत कुमार ने पुस्तकालय के महत्व पर अपने विचार रखे.
वक्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों में अध्ययन की आदत विकसित करने के साथ वैज्ञानिक एवं तार्किक सोच को बढ़ावा देने में पुस्तकालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है.
पुस्तकालय को ज्ञान का सशक्त केंद्र बनाने का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में पुस्तकालय कर्मियों एवं गणमान्य लोगों ने डॉ. एसआर रंगनाथन के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया. साथ ही महाराजा हरेन्द्र किशोर जिला केंद्रीय पुस्तकालय को ज्ञान, शिक्षा और शोध का और अधिक सशक्त केंद्र बनाने पर जोर दिया गया.
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