शिवनाथ हत्याकांड में 23 वर्षों बाद जिला जज चतुर्थ मानवेंद्र मिश्रा की कोर्ट ने आरोपियों को पाया दोषी

चर्चित शिवनाथ यादव हत्याकांड में 23 वर्षों के बाद मंगलवार को जिला जज चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की कोर्ट ने एक आरोपित को गैर इरादतन हत्या में दोषी पाया है.

बगहा. चर्चित शिवनाथ यादव हत्याकांड में 23 वर्षों के बाद मंगलवार को जिला जज चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की कोर्ट ने एक आरोपित को गैर इरादतन हत्या में दोषी पाया है. जबकि पांच अन्य को भादसं 324 में दोषी करार दिया है. कोर्ट ने अभियोजन पदाधिकारी मनु राव व बचाव पक्ष की दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के बयान को ध्यान में रखते हुए कांड के आरोपी सिंहासन यादव को भादसं 304(ii) के तहत गैर इरादतन हत्या के लिए दोषी करार दिया. जबकि अभियुक्त संजय यादव, ठाकुर यादव, नरेश यादव, उमेश यादव, प्रवेश यादव को भारतीय दंड संहिता 324 के तहत दोषी करार दिया. कोर्ट सजा के बिंदु पर बुधवार को सुनवाई करेगी. कोर्ट से दोषी करार देने के साथ ही पुलिस ने अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया. बुधवार को भी उनकी मौजूदगी में कोर्ट का फैसला आएगा.सड़क बनाने के दौरान हुआ था जानलेवा हमला.3 मार्च 2002 को सूचक प्रमोद यादव के लिखित तहरीर के आधार पर बगहा थाना कांड संख्या-38/2002 भादंसं की धारा 341, 323, 324, 325, 307, 302/34 के तहत करीब 9 बजे सुबह जब हमारे मोहल्ले में खड़ंजा सड़क को पक्का सड़क बनाने का कार्य चल रहा था.हमारे तथा सड़क के दूसरी तरफ के बबन यादव के राय से सड़क के आर-पार एक नाली बनवाई जा रही थी. इतने में सिंहासन यादव, भीग रासन यादव, जितेंद्र यादव, संजय यादव लाठी-डंडा तथा चाकू लेकर आ गए तथा हम लोगों को नाली बनाने से रोक दिए. पूछने पर कि यहां तुम्हारी जमीन भी नहीं है तो तुम्हें क्या मतलब है. इस पर बोले कि बस नाली नहीं बनने देंगे. हमलावरों ने हमला कर दिया. जिसमें शिवनाथ की मौत हो गई थी. जबकि कई लोग घायल हो गए थे. पुलिस ने लंबी जांच के बाद कोर्ट को सौंपी चार्जशीट नरेश यादव, प्रवेश यादव, सिंहासन यादव, ठाकुर यादव, संजय यादव, उमेश यादव और ललन यादव के विरुद्ध मामले को सत्य पाते हुए आरोप पत्र समर्पित किया गया. ट्रायल के क्रम में एक अभियुक्त ललन यादव का वाद दिनांक 07 जुलाई 2017 को अलग कर दिया गया. एक अन्य अभियुक्त जितेंद्र यादव का वाद आरोप गठन के पश्चात दिनांक 26 अप्रैल 2023 को प्रथम दृष्टया किशोर पाते हुए किशोर न्याय परिषद भेजा गया.

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Author: SATISH KUMAR

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