बगहा. वर्ष 2004 के बहुचर्चित हत्याकांड में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्र की अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया. सत्र वाद संख्या 210/2005 में नामजद आरोपी सचिन राव और बली यादव को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा. गोली मारकर कर दी गई थी हत्या
कई गवाह मुकर गए, कुछ ने घटना को अपनी आंखों से देखने से इनकार किया
इसमें कोर्ट ने सचिन राव और बली यादव पर संज्ञान लिया. पुलिस अनुसंधान के बाद विभिन्न धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया गया. मामले में सुनवाई के दौरान अदालत में कुल 12 अभियोजन गवाहों को पेश किया गया.हालांकि, कई गवाह मुकर गए, कुछ ने घटना को अपनी आंखों से देखने से इनकार किया और गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाया गया.सचिन राव और बली यादव की संलिप्तता ठोस साक्ष्य से प्रमाणित नहीं हो सकी
अदालत ने अपने निर्णय में यह भी उल्लेख किया कि विवेचक और पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक की गवाही प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे अभियोजन का पक्ष कमजोर हुआ. साथ ही, कुछ आरोपियों के विरुद्ध पूर्व में भी अन्य मामलों का उल्लेख आया. लेकिन वर्तमान वाद में सचिन राव और बली यादव की संलिप्तता ठोस साक्ष्य से प्रमाणित नहीं हो सकी. इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया. दोनों आरोपी पहले से जमानत पर थे, जिन्हें अब बंध पत्र की शर्तों से मुक्त कर दिया गया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
