त्रिवेणी संस्था के आठ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सात दिवसीय सिक्की कला प्रशिक्षण कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ. समापन समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया.इस दौरान पारंपरिक सिक्की कला को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के साथ महिलाओं और युवाओं को हुनर से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया.
त्रिवेणी संस्था के आठ वर्ष पूरे होने पर हुई कार्यशाला
सात दिनों तक चले प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सिक्की कला की विभिन्न तकनीकों के साथ आकर्षक एवं उपयोगी कलाकृतियां तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.भागलपुर से पहुंचे प्रशिक्षक एवं कलाकार दिलीप कुमार ने प्रतिभागियों को सिक्की कला की बारीकियों से अवगत कराया.उनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह और लगन के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया.संस्था की ओर से बताया गया कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं,बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया भी है. विशेष रूप से सिक्की कला महिलाओं के लिए घर बैठे स्वरोजगार का बेहतर अवसर उपलब्ध करा सकती है. महिलाएं सिक्की से आकर्षक उत्पाद तैयार कर उन्हें बाजार तक पहुंचाकर अपनी आय का साधन विकसित कर सकती हैं.
पारंपरिक कला को बाजार से जोड़ने की पहल
त्रिवेणी संस्था ने कहा कि पारंपरिक कलाओं को आधुनिक बाजार से जोड़कर ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं.संस्था की ओर से भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई,ताकि अधिक से अधिक लोगों को पारंपरिक कला, कौशल, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जा सके.
