Begusarai News: तेघड़ा गौशाला समिति के अध्यक्ष सह तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी राकेश कुमार के स्थानांतरण के उपलक्ष्य में रविवार को गौशाला समिति की ओर से विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इस दौरान उन्हें अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं गोवंश का प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया. समारोह में समिति के पदाधिकारियों और गणमान्य लोगों ने उनके कार्यकाल को गौशाला के विकास का स्वर्णिम अध्याय बताया.
गौशाला के विकास में निभाई अहम भूमिका
समाजसेवी सुरेश रौशन ने कहा कि राकेश कुमार केवल एक संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि गौसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व भी हैं. अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने गौवंश के संरक्षण, संवर्धन और बेहतर प्रबंधन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए.
चारदीवारी निर्माण और अतिक्रमण हटाने की हुई पहल
समिति के सदस्यों ने बताया कि उनके कार्यभार संभालने के समय गौशाला की सबसे बड़ी समस्या चारदीवारी का अभाव था. सुरक्षा नहीं होने के कारण भूमि पर अतिक्रमण का खतरा बना रहता था. राकेश कुमार की पहल और प्रशासनिक सक्रियता से चारदीवारी का निर्माण कराया गया, जिससे गौशाला सुरक्षित हुई. साथ ही वर्षों से हुए अतिक्रमण को हटाने की दिशा में भी कार्रवाई शुरू कराई गई.
प्रशासनिक कार्यों की भी हुई सराहना
वक्ताओं ने कहा कि उनके कार्यकाल में गौशाला का आधारभूत ढांचा मजबूत हुआ, स्वच्छता एवं रखरखाव की व्यवस्था बेहतर बनी और गौवंश की देखभाल को नई दिशा मिली. इसके अलावा सूखा नशा, अतिक्रमण, अपराध नियंत्रण और भरण-पोषण से जुड़े मामलों में भी उनकी पहल को सराहा गया.
'गौसेवा हमारी संस्कृति और संवेदनाओं का प्रतीक'
सम्मान ग्रहण करने के बाद राकेश कुमार ने कहा कि गौसेवा केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि तेघड़ा गौशाला समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करना उनके लिए सौभाग्य की बात रही. उन्होंने हमेशा प्रयास किया कि गौशाला की समस्याओं का स्थायी समाधान हो और गौवंश के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं.
तेघड़ा की जनता का स्नेह जीवनभर रहेगा याद
राकेश कुमार ने कहा कि चारदीवारी का निर्माण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई गौशाला के सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. उन्होंने विश्वास जताया कि समिति के सदस्य और स्थानीय लोग आगे भी गौशाला के विकास में सक्रिय योगदान देंगे. भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि तेघड़ा गौशाला से उनका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि आत्मीय रिश्ता बन गया था. यहां की जनता से मिला स्नेह, सम्मान और सहयोग वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे.
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