व्यंग्य लेखक डॉ रामरेखा की पुस्तक पुण्य की लूट पर व्याख्यान का आयोजन

जिला प्रगतिशील लेखक संघ एवं जिला साहित्य अकादमी बेगूसराय की ओर से कर्मचारी महासंघ भवन, बेगूसराय में किया गया.

बेगूसराय. जिला प्रगतिशील लेखक संघ एवं जिला साहित्य अकादमी बेगूसराय की ओर से कर्मचारी महासंघ भवन, बेगूसराय में किया गया. जिसकी अध्यक्षता जिला प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष डॉ सीताराम प्रभंजन एवं संचालन प्रलेस राज्य कार्यकारिणी सदस्या शगुफ्ता ताजवर ने की. मुख्य वक्ता डॉ तरुण कुमार, पूर्व विभागाध्यक्ष पटना विश्वविद्यालय ने कहा कि व्यंग्य एक विधा नहीं, बल्कि गहन की एक मुद्रा है. सत्य को उजागर करने का एक महत्वपूर्ण हथियार है. जहां भी जाना होता है वहां व्यंग्यकार पहुंच जाते हैं. समाज को सभ्य बनाने का काम व्यंग्यकार करते हैं. व्यंग्य का निर्माण ही विद्रोह से है. जन्मजात जो विद्रोही होते हैं, वही व्यंग्य लिखते हैं. यह वह प्रतिरोध है जो कला बन जाता है. व्यंग्य हमें सोचने पर मजबूर कर जाते हैं. हास्य हमें हंसाता है, लेकिन व्यंग्य देखने की अदा है. दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. डॉक्टर साहब की पुस्तक पुण्य की लूट में समाज की विडंबना को दर्शाया गया है. प्रलेस के पूर्व महासचिव एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राजन ने कहा कि व्यंग्य लेखक सभी नहीं हो सकते हैं, जो टकराने का दुःसाहस करेगा वही व्यंग्य लेखक हो सकता है। कबीर की परंपरा को लेखक आगे बढ़ाते हुए धर्म जाति पर चोट किया है. पूर्व विभागाध्यक्ष ल ना मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के डॉ चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा कि व्यंग्य लेखक पाठकों को संवेदनशील बनाता है. यह केवल मनोरंजन नहीं है बल्कि समाज की समस्याओं को पटल पर लाने का काम व्यंगकार करते हैं. प्राचार्य जीवछ महाविद्यालय मोतीपुर, मुजफ्फरपुर के डॉ रामनरेश पंडित रमण ने कहा कि संवेदना आमजन के हृदय को छूती है. व्यंग्य विधा को साहित्य में प्रतिष्ठापित करने का कार्य हरिशंकर परसाई ने किया है. इस विधा को आगे बढ़ाने का कार्य लेखक ने किया है. इस पुस्तक की सारी रचनाएं सामाजिक संदर्भ पर है. लेखक डॉ रामरेखा सिंह ने कहा कि जो हमने देखा, भोगा, सोचा वही मैंने लिखा. अंत में धन्यवाद ज्ञापन अधिवक्ता दुर्गा प्रसाद राय ने किया. इस अवसर पर मटिहानी के विधायक राजकुमार सिंह, राज्य प्रलेस सचिव राम कुमार सिंह, जिला प्रलेस सचिव कुंदन कुमारी, आइएमए अध्यक्ष डॉ एके राय, नरेंद्र कुमार सिंह, संपादक समय सुरभि अनंत, चितरंजन सिंह, अधिवक्ता वैद्यनाथ प्रसाद सिंह, दिनकर पुस्तकालय अध्यक्ष विश्वम्भर प्रसाद सिंह, अनिल पतंग, जलेस जिला सचिव राजेश कुमार, स्वाति गोदर, हरेकृष्ण राय मुन्ना, प्रभा कुमारी, विप्लवी पुस्तकालय सचिव अगम कुमार, कर्मचारी नेता मोहन मुरारी, अमर शंकर झा सुब्बा, मनोरंजन विप्लवी आदि मौजूद थे.

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By Amlesh prasad

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