बेगूसराय: उत्क्रमित उर्दू मध्य विद्यालय फफौत के नवनिर्मित भवन में अनियमितताओं का आरोप, अधूरे कार्य से छात्र-शिक्षक परेशान

बेगूसराय के फफौत स्थित उत्क्रमित उर्दू मध्य विद्यालय के नए भवन में निर्माण संबंधी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं. सीढ़ी पर छत न होना और वायरिंग का अधूरा काम छात्रों और शिक्षकों के लिए रोजाना परेशानी का सबब बन रहा है.

Begusarai News: बेगूसराय जिले के खोदावंदपुर प्रखंड क्षेत्र के उत्क्रमित उर्दू मध्य विद्यालय, फफौत में हाल ही में निर्मित दो मंजिला विद्यालय भवन के निर्माण कार्य में कई गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है. भवन का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद कई आवश्यक कार्य अब तक अधूरे हैं. इससे विद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.

सीढ़ी पर छत नहीं होने से परेशानी

भवन की ऊपरी मंजिल तक जाने वाली सीढ़ी के ऊपर छत की ढलाई नहीं होने की सबसे बड़ी समस्या बतायी जा रही है. बरसात के दौरान बारिश का पानी सीधे सीढ़ियों से होकर नीचे बरामदे में जमा हो जाता है. इससे फिसलन की स्थिति बनी रहती है और छोटे बच्चों के गिरकर घायल होने का खतरा रहता है. विद्यालय परिसर के बरामदे के कुछ हिस्सों और सीढ़ी के नीचे अब तक टाइल्स भी नहीं लगायी गयी है, जिससे वहां कीचड़ और गंदगी फैल जाती है.

वायरिंग और पंखे का काम अधूरा

शिक्षकों के अनुसार भवन में विद्युत वायरिंग का कार्य भी अधूरा है. निर्माण योजना के अनुसार विभिन्न कमरों में छह सीलिंग फैन लगाये जाने थे, लेकिन अब तक केवल तीन पंखे ही लगाये गये हैं. इस संबंध में कई बार संवेदक से आग्रह किया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. बरसात के मौसम में सीढ़ी के ऊपर एस्बेस्टस अथवा अन्य स्थायी छत नहीं होने के कारण लगातार पानी भवन के अंदर गिरता है, जिससे बरामदे में जलजमाव होता है.

भवन की मजबूती पर भी सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक इस तरह पानी गिरने से भवन की मजबूती पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है. ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के उपयोग का भी आरोप लगाया है. उनका कहना है कि भवन निर्माण स्थल पर प्राक्कलन (एस्टीमेट) संबंधी सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जबकि सरकारी निर्माण कार्यों में यह अनिवार्य माना जाता है.

निर्माण कार्य में पारदर्शिता पर सवाल

सूचना बोर्ड नहीं रहने के कारण आम लोगों और विद्यालय कर्मियों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि भवन का निर्माण किस योजना के तहत हुआ, इसकी लागत कितनी है तथा निर्माण एजेंसी या संवेदक कौन है. इससे निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सूचना बोर्ड नहीं लगाये जाने और अधूरे निर्माण कार्य के कारण सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका को बल मिल रहा है.

जांच और कार्य पूरा कराने की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी एवं गुणवत्ता संबंधी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. साथ ही दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने और सभी अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा कराने की मांग की गयी है, ताकि विद्यालय के छात्र-छात्राओं को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके.


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By Rajesh kumar

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