Begusarai News : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से बछवाड़ा प्रखंड के दियारा क्षेत्र की पांच पंचायतों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है. सड़कों पर पानी आ जाने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है. वहीं, किसानों के सामने फसल और पशु चारा बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी है. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल नाव उपलब्ध कराने और बाढ़ राहत कार्य शुरू करने की मांग की है.
दियारा क्षेत्र की सड़कों पर फैलने लगा पानी
ग्रामीणों के अनुसार, दो दिन पहले जिन सड़कों से लोग आसानी से आवागमन कर रहे थे, अब उन्हीं सड़कों पर बाढ़ का पानी फैल गया है. दियारा क्षेत्र की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क सहित निचले इलाकों में पानी भरने से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में लोगों को काफी परेशानी हो रही है. विशनपुर पंचायत के वार्ड संख्या 10 से 15 तक जाने वाली सड़कों पर करीब एक से डेढ़ फीट पानी जमा हो गया है. पानी का बहाव तेज होने के कारण ग्रामीणों को सड़क पार करने में भी खतरा बना हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि थोड़ी सी चूक होने पर पानी के तेज बहाव में बहने की आशंका रहती है. रात के समय घरों के आसपास पानी जमा रहने से सांप, विषैले कीड़े और आवारा जानवरों का खतरा भी बढ़ गया है.
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फसल बर्बाद होने की चिंता, पशु चारे का संकट
दियारा क्षेत्र के किसान पारस राय, राम सेवक राय, महेश्वर राय, काजो राय, विनोद राय, शिवचंद्र राय और मनोज कुमार समेत अन्य किसानों ने बताया कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है. खेती से होने वाली आमदनी से परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, शादी-विवाह और इलाज सहित अन्य जरूरतें पूरी होती हैं. किसान महंगे दाम पर खेत तैयार कर मक्का, धान, मिर्च और विभिन्न सब्जियों के साथ पशु चारे की खेती करते हैं, लेकिन हर वर्ष गंगा में आने वाली बाढ़ से फसल को नुकसान पहुंचता है. किसानों के सामने इस समय सबसे बड़ी समस्या पशु चारे की है. महंगाई के कारण गेहूं का भूसा एक हजार रुपये से अधिक प्रति क्विंटल मिल रहा है. गंगा का पानी बढ़ने के कारण वाहन चालक दियारा क्षेत्र में भूसा पहुंचाने से भी बच रहे हैं. ऐसे में किसान हरे चारे पर निर्भर हैं.
हरा चारा लाने में भी जान का खतरा
किसानों ने बताया कि पशुओं के लिए लगाये गये जनेर, मेंथ और बाजरा की फसल भी पानी में डूबने के कगार पर है. हरा चारा लाने के लिए किसानों को पानी से होकर खेतों तक जाना पड़ रहा है. खेतों में पानी जमा रहने के कारण वहां सांप, विषैले जीव और अन्य कीड़े छिपे रहते हैं. ऐसे में जान जोखिम में डालकर चारा लाना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि पर्याप्त चारा नहीं मिलने के कारण वे किसी तरह मवेशियों को आधे पेट खिलाकर रखने को मजबूर हैं. यदि जलस्तर में वृद्धि जारी रही, तो आने वाले दिनों में दियारा क्षेत्र में जरूरी सामान पहुंचाने के लिए भी नाव पर निर्भर रहना पड़ सकता है.
बीमार और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने की चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के दौरान सबसे गंभीर समस्या तब होती है, जब किसी बीमार व्यक्ति या गर्भवती महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ता है. ऐसे समय में नाव ही एकमात्र सहारा रह जाती है. समय पर नाव उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है.
स्कूल जाने में भी हो रही परेशानी
विशनपुर पंचायत के मुखिया उदय कुमार राय ने बताया कि पंचायत के कई हिस्सों में बाढ़ का पानी फैल चुका है. छह वार्डों के लोग प्रभावित हैं. पानी भरने के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों को विद्यालय जाने में भी परेशानी हो रही है. उन्होंने कहा कि यदि गंगा के जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही, तो दो से चार दिनों में दियारा क्षेत्र की पांचों पंचायतों को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़क पर भी पानी फैल सकता है. इससे आवागमन पूरी तरह बंद होने की आशंका है. मुखिया ने कहा कि समय रहते स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ राहत कार्य शुरू नहीं किया, तो आने वाले दिनों में लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है.
ग्रामीणों ने प्रशासन से नाव उपलब्ध कराने की मांग की
चमथा एक पंचायत के मुखिया संजय दास, दादुपुर पंचायत के मुखिया राम राय देवी, पंचायत समिति सदस्य मिथिलेश कुमार, कमल पासवान, पूर्व मुखिया श्रीराम राम समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय प्रशासन और जिलाधिकारी से दियारा क्षेत्र का जायजा लेने की मांग की है. उन्होंने विभिन्न पंचायतों में पर्याप्त संख्या में नाव उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि ग्रामीणों को जरूरी सामान लाने-ले जाने में परेशानी न हो.
20 सरकारी और 28 निजी नाव की व्यवस्था
इस संबंध में अंचलाधिकारी प्रीतम गौतम ने बताया कि दियारा क्षेत्र की पांच पंचायतों में 20 सरकारी नाव उपलब्ध करायी जा चुकी हैं. वहीं, 28 निजी नावों की सूची तैयार की गयी है. जरूरत के अनुसार इन नावों को विभिन्न पंचायतों में लगाया जायेगा. उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से पहले से ही सभी आवश्यक तैयारियां कर ली गयी हैं.
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